बाराबंकी। गर्मी के मौसम में तापमान बढ़ने से क्षेत्र में पेयजल संकट गहरा गया है। यह समस्या न केवल लोगों को, बल्कि वन्य जीवों और मवेशियों को भी प्रभावित कर रही है। खेतों और बागों के बीच खुदे तालाब पूरी तरह सूख गए हैं। इस कारण जंगली जानवर जैसे नीलगाय, सियार और हिरन पानी की तलाश में गोमती नदी और नहर की तरफ आ रहे हैं। आबादी के पास आने से ये जानवर आवारा कुत्तों के शिकार भी बन रहे हैं।
मनरेगा योजना के तहत बनाए गए कई तालाब या तो सूख चुके हैं या सूखने की कगार पर हैं। विभाग की ओर से इन तालाबों को पानी से भरने की अभी तक कोई योजना धरातल पर नहीं है। ब्लॉक क्षेत्र में लाखों रुपये खर्च कर बनाए गए करीब 45 अमृत सरोवर भी खराब स्थिति में हैं। इनमें कहीं कीचड़ दिख रहा है तो कहीं धूल उड़ रही है। असंद्रा, टेण्ड़वां, कादीपुर, बुधनाई, मीरापुर, डेढिया, गंगवाई पठनान, उस्मानपुर, सेमरावां, खानापुर, भिटौरालखन व कोठी समेत गांवों के किसान इस समस्या से जूझ रहे हैं।



स्थानीय किसान रामकैलाश यादव, अजय सिंह, मोहम्मद असलम समेत कई लोगों को पीने के पानी की सुविधा नहीं मिल पा रही है। पशुपालकों को अपने मवेशियों को पानी पिलाने के लिए दूर-दराज तक जाना पड़ रहा है। हालांकि एपीओ मनरेगा सिद्धौर अमित कुमार का ने बताया है कि क्षेत्रीय 96 पंचायत में करीब 45 के आसपास अमृत सरोवर है। इतने ही पुराने तालाब हैं। इनमें जल भरने को लेकर बीडीओ विनय विनय मिश्र के द्वारा मीटिंग कर तालाबों को चिन्हित करने का कार्य किया गया है।
उन्होंने बताया कि अधिकांश तालाबों में पानी है। जो सूखे पड़े हैं। उन्हें प्रक्रिया के तहत जल्द पानी भराया जाएगा।
