Barabanki news:डीएफओ साहब हरख रेंज में नही रुक रहा हरे खड़े पेड़ों का अवैध कटान सिर्फ किसानों पर की जा रही कार्यवाही ठेकेदारों पर मेहरबान

धारा लक्ष्य समाचार पत्र रिपोर्ट सतीश कुमार

बाराबंकी वन विभाग इसी तरह ढुल -मुल रवैया अपनाए रहा तो वह दिन दूर नहीं कि जब सभी प्राणी, प्राण वायु के लिए एक दूसरे के आगे हाथ फैला कर भीख के रूप में हवा मांगेंगे क्योंकि ठेकेदारों और वन विभाग का दुलमुल रवैयाइस प्रकार मजबूती बनाए हैं कि खुद वन विभाग के कर्मचारी हरे खड़े प्रतिबंधित पेड़ों की कटान के बाद पेड़ों के बचे शेष बूटों को मिटाने के लिए खुद उसे वन माफियाओं को जलाने का आदेश देते हैं।

यह मामला कहीं दूर का नहीं बल्कि बाराबंकी जनपद के हरख रेंज के अंतर्गत आने वाले गांव का है जहां पर पहले तो वन विभाग के कर्मचारी क्षेत्रीय वन माफियाओं से हाथ मिलाकर मित्रता बढ़ाते हैं और हरे – खड़े पेड़ों के कटान करवाते हैं जब इसकी शिकायत होती है तो वह उन्हें कार्यवाही से बचाने के लिए उसको मिटाने का फरमान जारी करते हैं ।

जिसे वन माफिया खुद अपने हाथों सेआग के हवाले करके उस बूट को जला देते हैं ताजा मामला बेनी प्रसाद वर्मा किसान इंटर कॉलेज महारूपुर के पीछे मिया की कटी बाग का है जहां पर क्षेत्र के सक्रिय और वन विभाग के पोषित वन माफिया रातों-रात हरे खड़े आम को काटकर धराशाई कर दिया और उसकी लकड़ी भी गायब कर दिया तो वहीं दूसरा मामला इसी स्थान से चंद कदमों की दूरी पर भानमऊ से जैदपुर रोड स्थित बादीपुर के पास उसीमियां की बाग का है ।

जहां पर हरा प्रतिबंधित आम का पेड़ एक वन विभाग के दोस्त वन माफिया नेकाटकर गायब कर दिया तो वहीं इससे पूर्व चकसर में हरा खड़ा प्रतिबंधित आम का पेड़ काटकर गायब करवा दिया गया और कार्यवाही के नाम पर सिर्फ वन क्षेत्राधिकारी द्वारा पेड़ काटने वालों को बचाने की कार्यवाही की गई।

जिसकी एक बार नहीं कई बार शिकायतें की गई वही नारायणपुर में एक सूखे आम के परमिट की आड में हर-खड़ा आम का पेड़ भी काट कर गायब कर दिया और कार्यवाही न होने से इसी वन माफिया ने महरुपुर में अवैध कटान करवा डाला और साक्ष्य मिटाने के लिए बूट को आग के हवाले कर दिया संबंधित मामले की जानकारी के लिए जब वन क्षेत्राधिकारी हरख प्रदीप सिंह के नंबर पर कई बार संपर्क किया गया ।

तो उनका फोन ही नहीं रिसीव हुआ इसी रेंज में प्रतिबंधित पेड़ों की कटान करने के बाद किसानों से प्रतिकर के रूप में₹10000प्रति पेड़ की दर से वसूले गए तो आखिर ठेकेदारों पर कार्यवाही क्यों नहीं ।आखिर क्षेत्र के इन वन माफियाओं को किसका संरक्षण प्राप्त है जो इन पर कार्यवाही करने से वन क्षेत्राधिकारी भी कतरा रहे है ।

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