Barabanki UP: दाल के बढ़े भाव ने जगाई अरहर की खेती की प्रेरणा

धारा लक्ष्य समाचार पत्र 

 फतेहपुर बाराबंकी। कहते हैं आवश्यकता आविष्कार की जननी है तो जी हां,यह कधन एकदम सत्य है और इस तथ्य को सत्य सिद्ध कर के दिखा दिया है फतेहपुर ब्लाक के अंतर्गत आने वाली कुछ ग्राम पंचायतों ने,इन ग्राम पंचायतों में प्रमुख हैं मझगवां सरैया और धमसड़ ग्राम पंचायतें यहां के किसान खेत के किनारे खाली पड़ी जमीन पर पिछले तीन सालों से अरहर के बीजों की बुआई बरसात के मौसम में कर देते हैं।

फिर साल में एक या दो बार फूल आने पर कीटनाशकों का छिड़काव करके इतनी दाल का उत्पादन कर लेते हैं कि साल भर उनको दाल के लिए दुकान का मुंह नहीं देखना पड़ता है। इस बारे में जब हमने सरैया खंता निवासी एक किसान परमानंद वर्मा से जानकारी प्राप्त की तो पता चला कि दाल की बढ़ती कीमतों के कारण एक दिन उनके मन ऐसा विचार आया कि क्यों न खेत के किनारे खाली पड़ी खरपतवार युक्त भूमि को साफ करके अरहर के बीजों की बुआई लायक बनाया।

जाय इस प्रकार से अपने विचार को जब उन्होंने धरातल पर उतारा तो सचमुच अरहर के कुछ सौ पेड़ों से इतनी दाल पैदा हुईं कि अपने पांच सदस्यीय परिवार के लिए वह पर्याप्त तो थी ही, बाकी यह दाल उनको खेत मालिक को उसका हिस्सा देकर मिली थी। तब से उनकी देखा-देखी अब अनेक किसानों के खेतों के किनारे यह दलहनी फसल लहलहा रही है और खेतों में पारंपरिक रूप से जिस खेती के लिए फतेहपुर ब्लाक जाना जाता है धान,आलू, पिपरमिंट, सरसों, गेहूं और पिछले कुछ सालों से खरबूजा और तरबूज की खेती तो चल ही रही है।

Related posts