धारा लक्ष्य समाचार पत्र
अमेठी। भारतीय संस्कृति में हर परंपरा के पीछे कोई न कोई गहरा अर्थ और संदेश छिपा होता है। ऐसी ही एक प्राचीन परंपरा है प्रबोधिनी एकादशी की अगली सुबह सूप बजाने की। कहा जाता है कि इस दिन सुबह लगभग चार बजे घर की माताएं या कोई एक सदस्य टूटा हुआ सूप लेकर पूरे घर में घूमते हुए उसे बजाता है। हर कोने में जाकर सूप खटखटाते हुए कहा जाता है—
“दरिद्रता भागे, मां लक्ष्मी आए।”
आम बोलचाल में लोग इसे “दलिद्दर भाग, लक्ष्मी अंदर आ” कहते हैं। इसके बाद सूप को लोग घर से बाहर दूर फेंक देते हैं और उसे जला कर ताप लेते है।
*क्या है इस परंपरा का भावार्थ*
सूप बजाने का अर्थ केवल आवाज़ करना नहीं, बल्कि यह एक प्रतीकात्मक प्रक्रिया है। सूप को भारतीय संस्कृति में धन और अन्न का प्रतीक माना गया है। इसका मुख्य कार्य है—अच्छी चीजों को अलग रखना और अशुद्ध व बेकार वस्तुओं को अलग निकाल देना।
जैसे सूप अन्न को शुद्ध करता है, वैसे ही इसकी आवाज़ घर से नकारात्मक ऊर्जा को बाहर निकालती है और सकारात्मकता यानी मां लक्ष्मी के आगमन का संकेत देती है।
*धार्मिक मान्यता*
प्रबोधिनी एकादशी को भगवान विष्णु के चार महीने के शयन के बाद जागने का दिन माना जाता है। इस दिन से शुभ कार्यों की पुनः शुरुआत होती है। माना जाता है कि सूप बजाने की ध्वनि से दरिद्रता और आलस्य दूर होता है तथा घर में समृद्धि, सुख और शांति का वास होता है।
*मानसिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण*
अगर इसे मनोवैज्ञानिक रूप से देखा जाए तो सूप बजाने की यह परंपरा एक सकारात्मक मानसिक अभ्यास है। यह हमें यह स्मरण कराती है कि दीवाली और प्रबोधिनी एकादशी केवल दीप जलाने या पूजा करने का पर्व नहीं, बल्कि यह नकारात्मकता, आलस्य और आर्थिक अभाव को दूर कर नई ऊर्जा और समृद्धि का स्वागत करने का अवसर है। दलिद्दर को पीटने के बाद उसे अपने आंखों के सामने जलकर नष्ट भी कर देते हैं।
*सदियों पुरानी परंपरा*
यह परंपरा सदियों से भारतीय घरों में निभाई जाती आ रही है। लोकमान्यता है कि सूप की आवाज मात्र से ही घर की दरिद्रता और नकारात्मक शक्तियाँ दूर भागती हैं। यही कारण है कि आज भी कई ग्रामीण और पारंपरिक घरों में प्रबोधिनी एकादशी की सुबह सूप बजाने की यह परंपरा जीवित है।
प्रबोधिनी एकादशी पर सूप बजाना केवल एक धार्मिक कर्मकांड नहीं, बल्कि यह शुद्धता, सकारात्मकता और समृद्धि का प्रतीक है — एक ऐसी परंपरा जो यह संदेश देती है कि मेहनत, विश्वास और आस्था से हर घर में सुख-समृद्धि का वास हो सकता है।

