धारा लक्ष्य समाचार दिवाकर कसौधन
बलरामपुर। कोतवाली देहात क्षेत्र के कोडरी घाट पुल के समीप राप्ती नदी में अवैध रेत खनन का तांडव बेरोकटोक जारी है। दिनदहाड़े तेज रफ्तार ट्रैक्टर-ट्रॉलियां बेखौफ होकर रेत ढो रही हैं, जिसने स्थानीय प्रशासन और खनन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
ग्रामीणों का आरोप है कि खनन माफिया बिना किसी भय के नदी के किनारों को तेजी से खोद रहे हैं, जिससे पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंच रहा है और नदी के प्राकृतिक बहाव में बदलाव का खतरा मंडरा रहा है। शिकायतें लगातार मिल रही हैं, लेकिन न तो कोई कार्रवाई हो रही है और न ही इस अवैध गतिविधि की रोकथाम।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि अवैध खनन की पूरी गतिविधि सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरों और वीडियो में स्पष्ट दिखाई दे रही है ट्रॉलियों की लंबी कतार, मशीनों का शोर और नदी का बेरहमी से दोहन। इसके बावजूद, सरकारी मशीनरी का मौन लोगों के गले नहीं उतर रहा है स्थानीय लोगों का सीधा सवाल है कि जब यह ‘रेत की लूट’ दिनदहाड़े और कैमरे में कैद हो रही है, तो कार्रवाई क्यों नहीं क्या खनन माफियाओं को किसी बड़े संरक्षण का सहारा हासिल है जनता अब केवल प्रशासनिक हस्तक्षेप और कड़ी कार्रवाई का इंतजार कर रही है
*पुरानी शिकायतें भी ठंडे बस्ते में
यह जिले में अवैध खनन का कोई पहला मामला नहीं है। तकरीबन डेढ़ माह पहले कोतवाली जरवा क्षेत्र के नेवलगढ़ के समीप धोबह नल से जनकपुर रेंज के रेंजर अमरजीत प्रसाद द्वारा कथित रूप से कई महीनों से खनन किया जा रहा था। पत्रकार द्वारा खबर लिखे जाने और वरिष्ठ अधिकारियों के संज्ञान में लाए जाने के बावजूद, इस मामले में भी अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। रेंजर द्वारा पत्रकार को वीडियो डिलीट करने और मिलने’ की बात करने का ऑडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल है और संगठन द्वारा शिकायत भी दर्ज कराई गई है।
एक तरफ राप्ती का चीरहरण, दूसरी तरफ पुराने मामलों पर चुप्पी यह स्थिति दर्शाती है कि जिले में खनन माफिया प्रशासन से बेखौफ होकर कार्य कर रहे हैं, जिससे सरकार की जीरो टॉलरेंस की नीति पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

