गौहनिया बाई पास पर भारतीय किसान यूनियन (किसान) का सत्याग्रह आन्दोलन 12 वें दिन भी जारी रहा।
धारा लक्ष्य समाचार पत्र
भाकियू (किसान) ने छह सूत्रीय मांगों को लेकर सत्याग्रह प्रारंभ किया था। जिसमें मुख्य रूप से जल जीवन मिशन- हर घर नल से जल- योजना में भ्रष्टाचार की जांच एवं गरीबों को उनकी भूमि पर कब्जा दिलाने की मांगें थीं। दो गांवों की सीमा पर एक बुजुर्ग महिला की दबंगई से जहां 25 दलित परिवारों को उनके ही बैनामें की जमीन पर कब्जा नहीं मिल पा रहा है। वहीं इस मामले बुजुर्ग महिला की दबंगई के प्रशासन भी लाचार हो गया है।
सत्याग्रह के 12 वें दिन शनिवार को बारा तहसील के कानूनगो सुभाष त्रिपाठी ने दो गांवों गडरा व टिकरी तालुका कंजासा का सीमांकन कर वहां पत्थर भी गड़वा दिया, लेकिन स्थानीय दबंगों के कारण 25 परिवार अपनी बैनामे की भूमि पर कब्जा नहीं कर पा रहे हैं।
भाकियू किसान की मांग पर एसीपी कौंधियारा ने हस्तक्षेप किया । गरीबों को उनकी भूमि पर कब्जा दिलाने के लिये एसओ घूरपुर ने भी आश्वासन दिया। लेकिन अभी तक स्थानीय एक बुजुर्ग महिला की दबंगई के कारण पुलिस प्रशासन भी लाचार हो गया लगता है।
भारतीय किसान यूनियन (किसान) के पूर्वांचल प्रभारी राजीव चन्देल ने कहा कि 25 दलित समाज के गरीब परिवारों को जब तक न्याय नहीं मिलेगा तब तक सत्याग्रह जारी रहेगा। 2 दिसम्बर तक फैसला न हुआ तो सैकड़ो की संख्या में पीड़ित किसान पैदल लखनऊ मुख्यमंत्री से फरियाद करने जायेंगे
सत्याग्रह आंदोलन प्रदेश महासचिव विक्रम सिंह, मंडल महासचिव धर्मेंद्र सिंह पटेल, मंडल अध्यक्ष मंजूराज आदिवासी, मंडल उपाध्यक्ष मनोरमा आदिवासी, जिलाध्यक्ष जेपी यादव, जिला संगठन मंत्री शिव शंकर सिंह, मीडिया प्रभारी पुष्पराज सिंह, रमाकांत निषाद, जिलाध्यक्ष विधि प्रकोष्ठ श्याम सिंह बघेल, अधिवक्ता दिनेश निषाद, सीता आदिवासी, सेवा लाल, बलराम बंसल सहित सैकड़ो लोग उपस्थित थे।

