Sitapur Uttar Pradesh: सरकारी गाटा 1032 विपक्षी के कब्जा में, पड़ोसी की भूमि विवाद में आदेशों की अवहेलना का आरोप, प्रशासनिक संरक्षण पर उठे गंभीर सवाल

आयुक्त के तीसरी बार के आदेश, एसडीएम की टिप्पणी और बिना यथास्थिति आदेश के बावजूद कार्रवाई शून्य, जिलाधिकारी से हस्तक्षेप की मांग।

धारा लक्ष्य समाचार 

सैय्यद जावेद क़ासिम

सीतापुर जनपद के एक गंभीर भूमि विवाद प्रकरण में न्यायिक व प्रशासनिक आदेशों के अनुपालन न होने को लेकर जिलाधिकारी को शिकायत पत्र सौंपा गया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कानून का समान रूप से प्रयोग नहीं हो रहा है और प्रभावशाली पक्ष को संरक्षण देकर प्रकरण को जानबूझकर लंबित रखा गया है, जिससे आमजन में रोष व्याप्त है।

शिकायत के अनुसार माननीय आयुक्त महोदय द्वारा तीन बार स्पष्ट आदेश पारित किए गए, साथ ही 26 जून 2025 को एसडीएम सदर द्वारा लिखित टिप्पणी भी की गई, इसके बावजूद जमीनी स्तर पर शून्य अनुपालन हुआ है। यह भी उल्लेख किया गया है कि विपक्षी के पक्ष में किसी भी सक्षम न्यायालय से कोई भी “यथास्थिति आदेश” (स्टेटस-क्वो) पारित नहीं है, फिर भी अनुचित रूप से कार्रवाई रोकी गई है।

प्रकरण में भू-माफियाओं द्वारा स्पष्ट रूप से अवैध कब्जा और अवैध निर्माण किए जाने का आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि यही मामला किसी सामान्य नागरिक से जुड़ा होता, तो तत्काल बुलडोज़र कार्रवाई कर दी जाती, लेकिन यहां प्रभावशाली लोगों को बचाने के लिए नियमों को नजरअंदाज किया जा रहा है।

शिकायत में यह भी कहा गया है कि सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत दायर आरटीआई और अपीलीय आरटीआई दोनों का कोई उत्तर नहीं दिया गया, जो कानून की खुली अवहेलना है। इससे प्रशासनिक स्तर पर जानबूझकर टालमटोल और संरक्षण की गंभीर आशंका और मजबूत होती है।

आरोप है कि आदेश होते हुए भी प्रार्थी को न्याय से वंचित रखा गया है, जिससे उसके संवैधानिक अधिकारों का दमन हो रहा है। शिकायतकर्ता का कहना है कि यह पूरा प्रकरण न्यायिक प्रक्रिया के दुरुपयोग और भू-माफियाओं को संरक्षण देने का उदाहरण बन चुका है।

प्रार्थना पत्र में जिलाधिकारी से मांग की गई है कि पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, सभी न्यायालयी आदेशों का शीघ्र और प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित कराया जाए, राजनीतिक व प्रशासनिक हस्तक्षेप को रोका जाए तथा दोषी अधिकारियों और भू-माफिया तत्वों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए।

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