बाराबंकी में मौत का धंधा: झोलाछाप अस्पतालों और नशीली दवाओं के सिंडिकेट पर भारतीय किसान मजदूर दशहरी यूनियन की हुंकार,योगी सरकार के ‘रामराज्य’ में आमजन की जान खतरे में, भ्रष्टाचार की मलाई काट रहे अधिकारी
यूट्यूब सर्जरी से मौत, 77 क्लिनिकों पर दिखावटी कार्रवाई और छह घंटे में दोबारा खुला सिस्टम — भ्रष्ट अधिकारियों की जांच की मांग
अवैध अस्पतालों पर कार्रवाई सिर्फ दिखावा? भारतीय किसान मजदूर यूनियन दशहरी संगठन ने जिलाधिकारी महोदय संबोधित ज्ञापन अतिरिक्त मजिस्ट्रेट को सौंपा, भ्रष्ट अधिकारियों की जांच की मांग
धारा लक्ष्य समाचार पत्र
बाराबंकी।प्रदेश सरकार भले ही रामराज्य और जीरो टॉलरेंस की नीति का दावा कर रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट नजर आ रही है। सरकारी महकमों में व्याप्त भ्रष्टाचार आम आदमी की जान पर भारी पड़ता दिख रहा है। हालात ऐसे हैं कि आम नागरिक की जान की कीमत कीड़े-मकोड़ों से भी बदतर होती जा रही है।हाल ही में जनपद के कोठी क्षेत्र स्थित दामोदर औषधालय का मामला सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना रहा। आरोप है।
कि यहां यूट्यूब वीडियो देखकर मरीज का ऑपरेशन किया गया, जिसमें मरीज की मौत हो गई। इस गंभीर घटना के बावजूद स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।कुछ दिन पूर्व स्वास्थ्य विभाग द्वारा जनपद में 77 अवैध अस्पतालों व क्लिनिकों पर कार्रवाई किए जाने का दावा किया गया था,
लेकिन विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार यह कार्रवाई महज औपचारिक साबित हुई। बताया जा रहा है कि कथित सुविधा शुल्क और ‘मोटी मलाई’ के चलते अधिकांश अवैध अस्पताल छह घंटे के भीतर ही दोबारा संचालित हो गए।जहां एक ओर जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई करते दिखाई देते हैं, वहीं दूसरी ओर जिन अधिकारियों को जांच की जिम्मेदारी सौंपी जाती है,
उनके लिए शिकायतें कथित तौर पर कमाई का जरिया बनती जा रही हैं। यदि समय रहते भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश नहीं लगाया गया, तो हालात और भी भयावह हो सकते हैं।इन्हीं गंभीर परिस्थितियों को देखते हुए भारतीय किसान मजदूर यूनियन (दशहरी) ने जिला प्रशासन का ध्यान आकृष्ट कराया है।
संगठन ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर जनपद में संचालित अवैध अस्पतालों और नशीली दवाओं की बिक्री पर सख्त रोक लगाने की मांग की है।संगठन के प्रदेश सचिव निहाल सिद्दीकी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अवैध अस्पतालों के संचालक और नशीली दवाओं के विक्रेता खुलेआम कानून को चुनौती दे रहे हैं।
उन्होंने जिलाधिकारी से मांग की कि ऐसे तत्वों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए, साथ ही शिकायतों को नजरअंदाज कर सुविधा शुल्क का खेल खेलने वाले जांच अधिकारियों की भी निष्पक्ष जांच कराई जाए।
वहीं संगठन के विधि प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष राहुल मिश्रा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि जनपद में अवैध अस्पतालों का एक संगठित गिरोह सक्रिय है, जो किसी माफिया सिंडिकेट की तरह काम कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग के कुछ भ्रष्ट अधिकारी इस पूरे नेटवर्क को संरक्षण दे रहे हैं,
जिसके चलते आम जनता की जान खतरे में पड़ रही है।किसान मजदूर संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन का रास्ता अपनाने से भी पीछे नहीं हटेगा।
मुख्य रूप से मौजूद रहे अयोध्या मंडल महामंत्री सुशील कुमार यादव, युवा जिलाध्यक्ष मयंक रावत, मोहम्मद अलीम जिला सचिव, चंद्रिका प्रसाद वरिष्ठ तहसील उपाध्यक्ष, सिरौली गौसपुर तहसील अध्यक्ष नियाज अंसारी,
दिलशाद हुसैन देवा ब्लॉक अध्यक्ष, सत्येंद्र यादव हरक ब्लॉक अध्यक्ष, नगर अध्यक्ष शहर मुकेश रावत, नगर वरिष्ठ उपाध्यक्ष अजय वर्मा, जियाउद्दीन नगर उपाध्यक्ष, शिवा, हारून, वैस आदि तमाम लोग उपस्थित रहे

