Varanasi UP…कृषि प्रीमियर लीग (एपीएल-2K26): महिला फाइनल, प्राध्यापक मैत्री मुकाबला और पुरुष सेमीफाइनल ने रचा नया इतिहास

कृषि प्रीमियर लीग (एपीएल-2K26): महिला फाइनल, प्राध्यापक मैत्री मुकाबला और पुरुष सेमीफाइनल ने रचा नया इतिहास

वाराणसी एग्रीकल्चर ग्राउंड में आज खेल, उत्साह और गरिमा का अद्भुत संगम देखने को मिला, जब कृषि प्रीमियर लीग (एपीएल-2K26) के अंतर्गत महिला वर्ग का फाइनल, कृषि संस्थान (आईएएस) एवं आयुर्विज्ञान संस्थान (आईएमएस) के प्राध्यापकों के बीच मैत्री मुकाबला तथा पुरुष वर्ग का सेमीफाइनल आयोजित किया गया। दिनभर मैदान में दर्शकों की भारी उपस्थिति रही और तालियों की गूंज से वातावरण उत्सवमय बना रहा।

महिला प्रीमियर लीग के खिताबी मुकाबले में थंडर क्वींस और धाखड़ 11 आमने-सामने थीं। टॉस जीतकर थंडर क्वींस ने पहले गेंदबाजी का निर्णय लिया, जो पूरी तरह सही साबित हुआ। सधी हुई और अनुशासित गेंदबाजी के सामने धाखड़ 11 की टीम निर्धारित 10 ओवरों में मात्र 53 रन ही बना सकी। लक्ष्य का पीछा करते हुए थंडर क्वींस की बल्लेबाजों ने धैर्य और समझदारी का परिचय दिया तथा 56 रन बनाकर मुकाबला आसानी से अपने नाम कर लिया। इस शानदार जीत के साथ थंडर क्वींस ने लगातार दूसरी बार खिताब जीतकर अपनी बादशाहत कायम रखी। वेसेली को उनके महत्वपूर्ण 21 रनों के लिए मैच का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुना गया। खिलाड़ियों के आत्मविश्वास और टीम भावना ने महिला सशक्तिकरण का प्रेरक संदेश भी दिया।

इसी क्रम में कृषि संस्थान और आयुर्विज्ञान संस्थान के प्राध्यापकों के बीच खेले गए मैत्री मुकाबले ने भी दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। पहले बल्लेबाजी करते हुए आयुर्विज्ञान संस्थान की टीम ने 121 रनों का मजबूत स्कोर बनाया। डॉ. सीताराम ने 29 गेंदों पर 46 रन तथा डॉ. पंकज ने 18 गेंदों पर 38 रन बनाकर टीम को सशक्त स्थिति में पहुंचाया। जवाब में कृषि संस्थान की टीम ने भी शानदार बल्लेबाजी करते हुए मुकाबले को रोमांचक बना दिया, किंतु अंततः आयुर्विज्ञान संस्थान की टीम ने संयम बनाए रखते हुए जीत दर्ज की। यह मुकाबला खेल भावना और आपसी सौहार्द का सुंदर उदाहरण रहा।

पुरुष वर्ग के सेमीफाइनल में स्पार्टन और एआरएस के बीच कड़ा मुकाबला खेला गया। एआरएस ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का निर्णय लिया और मैच रोमांचक मोड़ तक पहुंच गया। खिलाड़ियों के जोश और दर्शकों के उत्साह ने सेमीफाइनल को यादगार बना दिया।
इस भव्य आयोजन में विश्वविद्यालय क्रीड़ा परिषद के अध्यक्ष प्रोफेसर ए. के. नेमा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कृषि टीम की ओर से वरिष्ठ प्राध्यापक प्रोफेसर सतीश कुमार सिंह एवं प्रोफेसर पद्मनाभन द्विवेदी ने न केवल अपनी गरिमामयी उपस्थिति से कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई, बल्कि मैदान में उतरकर खेल में भी सक्रिय सहभागिता निभाई। अतिथि के रूप में इलाहाबाद विश्वविद्यालय के विधि संकायाध्यक्ष प्रोफेसर आदेश मौर्य तथा कोसमोडर्मा क्लिनिक, भोजुबीर की त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. ध्वनि जायसवाल भी उपस्थित रहीं और खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया। आज के कार्यक्रम के आयोजन में आयुर्विज्ञान संस्थान की ओर से डॉ. दिनेश मीणा तथा कृषि संस्थान की ओर से डॉ. तरुण वर्मा और डॉ. सुधीर राजपूत की उल्लेखनीय भूमिका रही। आयोजन की सफलता में डॉ. रोहित शर्मा का विशेष सहयोग सराहनीय रहा।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि प्रोफेसर ए. के. नेमा ने अपने संबोधन में कहा कि खेल केवल शारीरिक क्षमता का प्रदर्शन नहीं, बल्कि अनुशासन, नेतृत्व और टीम भावना का सशक्त माध्यम है। उन्होंने विद्यार्थियों से खेल और शिक्षा के बीच संतुलन बनाए रखने का आह्वान किया। प्रोफेसर सतीश कुमार सिंह ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन संस्थान में आपसी समन्वय और सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाते हैं। प्रोफेसर पद्मनाभन द्विवेदी ने खिलाड़ियों के उत्साह की सराहना करते हुए कहा कि खेल जीवन में संघर्ष और धैर्य की सीख देता है।

प्रोफेसर आदेश मौर्य ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि स्वस्थ प्रतिस्पर्धा व्यक्तित्व विकास की आधारशिला है और ऐसे आयोजन युवाओं को अनुशासन व आत्मविश्वास प्रदान करते हैं। डॉ. तरुण वर्मा ने आयोजन की रूपरेखा पर प्रकाश डालते हुए सभी प्रतिभागियों और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया तथा कहा कि कृषि प्रीमियर लीग विद्यार्थियों की प्रतिभा को मंच देने का सशक्त प्रयास है। डॉ. सुधीर राजपूत ने खिलाड़ियों के समर्पण की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह प्रतियोगिता संस्थान में एकता, उत्साह और सकारात्मक वातावरण को निरंतर सुदृढ़ कर रही है।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. नागेंद्र सिंह ने प्रभावशाली ढंग से किया। उनके साथ कोमल, प्रशांत, नितिन और आकाशदीप ने मंच व्यवस्था को सुव्यवस्थित और ऊर्जावान बनाए रखा।

समग्र रूप से आज का दिन कृषि प्रीमियर लीग के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित हो गया। महिला वर्ग के ऐतिहासिक फाइनल, प्राध्यापकों के सौहार्दपूर्ण मुकाबले और पुरुष सेमीफाइनल की रोमांचक टक्कर ने यह सिद्ध कर दिया कि यह प्रतियोगिता केवल खेल तक सीमित नहीं, बल्कि अनुशासन, नेतृत्व, टीम भावना और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का सशक्त मंच है।

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