Varanasi UP…काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में रंगभरी एकादशी से पहले अबीर-गुलाल अर्पित, महालक्ष्मी मूर्ति स्थापना की उठी मांग।

काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में रंगभरी एकादशी से पहले अबीर-गुलाल अर्पित, महालक्ष्मी मूर्ति स्थापना की उठी मांग।

वाराणसी। रंगभरी एकादशी से एक दिन पूर्व काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में भक्तों ने सदियों पुरानी परंपरा को प्रतीकात्मक रूप से निभाया। काशी विश्वनाथ दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष जंत्रलेश्वर यादव के नेतृत्व में श्रद्धालुओं ने माता महालक्ष्मी/भारत माता की प्रतिमा उपलब्ध न होने के कारण माता अन्नपूर्णा के चरणों में अबीर-गुलाल अर्पित कर परंपरा का निर्वहन किया।
जंत्रलेश्वर यादव ने बताया कि रंगभरी एकादशी के एक दिन पूर्व माता महालक्ष्मी की प्रतिमा पर अबीर-गुलाल चढ़ाने की परंपरा वर्षों से चली आ रही है। पिछले वर्ष भी प्रतिमा उपलब्ध न होने के कारण प्रतीकात्मक रूप से पूजन किया गया था। उन्होंने मांग की कि काशी विश्वनाथ धाम में महालक्ष्मी की प्रतिमा शीघ्र स्थापित की जाए, ताकि नियमित पूजा-अर्चना और अबीर-गुलाल चढ़ाने की परंपरा सुचारु रूप से निभाई जा सके।
उन्होंने कहा कि महालक्ष्मी की प्रतिमा को धाम में उचित स्थान पर स्थापित किया जाना चाहिए और परंपरा के अनुसार एक दिन पूर्व अबीर-गुलाल चढ़ाने का अधिकार भक्तों को मिलना चाहिए। इस संबंध में कमिश्नर और मुख्य कार्यपालिका अधिकारी से पूर्व में भी निवेदन किया जा चुका है। उन्होंने स्मरण कराया कि पूर्व कमिश्नर कौशल राज शर्मा ने भी प्रतिमा स्थापना के लिए मुख्य कार्यपालिका अधिकारी को निर्देश दिए थे।
इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने “हर-हर महादेव” के जयघोष के साथ महालक्ष्मी प्रतिमा स्थापना की मांग दोहराई। स्वर्गीय तेजू सरदार द्वारा रचित दोहे को बाबा बाबा सब कहे, माई कहे ना कोय। बाबा के दरबार में, माई कहे सो होय।। बोलकर विधिवत पूजन संपन्न हुआ।
कार्यक्रम में मनोज शर्मा, सारिका सिन्हा रजनी यादव, आरती शर्मा, विनय जायसवाल, रजनी जायसवाल, संगीता जायसवाल, नीरू चौरसिया, अभिषेक पांडेय सहित काशी विश्वनाथ दल प्रधान केंद्र काशी के अन्य पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे।

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