Varanasi UP …सोशल मीडिया पोस्ट विवाद: मधु पूर्णिमा किश्वर मामले में कोर्ट सख्त, पुलिस से रिपोर्ट तलब।

सोशल मीडिया पोस्ट विवाद: मधु पूर्णिमा किश्वर मामले में कोर्ट सख्त, पुलिस से रिपोर्ट तलब।

वाराणसी अदालत ने 15 अप्रैल तक मांगी विस्तृत आख्या, प्रार्थना पत्र में भ्रामक व मानहानिकारक सामग्री प्रसारित करने के आरोप।

वाराणसी में सोशल मीडिया पर कथित आपत्तिजनक, भ्रामक और मानहानिकारक सामग्री के प्रसारण को लेकर दायर एक प्रार्थना पत्र पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने थाना कैंट, वाराणसी से मामले में विस्तृत रिपोर्ट तलब करते हुए अगली सुनवाई की तिथि 15 अप्रैल 2026 निर्धारित की है।
यह प्रार्थना पत्र अधिवक्ता शशांक शेखर द्वारा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 173(4) के अंतर्गत प्रस्तुत किया गया है, जिसमें सामाजिक कार्यकर्ता मधु पूर्णिमा किश्वर पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के दुरुपयोग का आरोप लगाया गया है।
प्रार्थना पत्र में कहा गया है कि एक सत्यापित (Verified) अकाउंट के माध्यम से लगातार भ्रामक, असत्य, भड़काऊ एवं मानहानिकारक पोस्ट साझा किए गए, जिनमें देश के प्रधानमंत्री एवं संवैधानिक संस्थाओं के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां शामिल हैं। इससे समाज में भ्रम, असंतोष और वैमनस्य फैलने की आशंका जताई गई है।
अधिवक्ता के अनुसार, यह कोई एकल घटना नहीं बल्कि सुनियोजित तरीके से किया गया दुष्प्रचार है। प्रार्थना पत्र के साथ सोशल मीडिया पोस्ट के स्क्रीनशॉट, व्हाट्सऐप चैट और ईमेल संवाद जैसे डिजिटल साक्ष्य भी प्रस्तुत किए गए हैं।
यह भी उल्लेख किया गया है कि मधु पूर्णिमा किश्वर को पूर्व में कई विधिक नोटिस भेजे गए थे, जिनमें उनसे अपने कथनों के समर्थन में साक्ष्य देने या आपत्तिजनक सामग्री हटाने का अनुरोध किया गया था, लेकिन कथित तौर पर न तो संतोषजनक जवाब दिया गया और न ही सामग्री में कोई संशोधन किया गया।
अदालत ने मामले को प्रकीर्ण वाद के रूप में दर्ज करते हुए पुलिस से यह स्पष्ट करने को कहा है कि क्या इस संबंध में पहले कोई शिकायत दर्ज हुई है, जांच की स्थिति क्या है, और यदि FIR दर्ज नहीं की गई है तो उसके कारण क्या हैं।
कानूनी जानकारों के अनुसार, पुलिस की रिपोर्ट के आधार पर ही अदालत आगे की कार्रवाई तय करेगी, जिसमें FIR दर्ज करने का आदेश भी शामिल हो सकता है।
अधिवक्ता शशांक शेखर ने अदालत के आदेश का स्वागत करते हुए कहा कि सोशल मीडिया के दुरुपयोग से सामाजिक सौहार्द और राष्ट्रीय एकता को नुकसान पहुंचाने वाले मामलों में सख्त कार्रवाई आवश्यक है।
डिजिटल युग में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सामाजिक जिम्मेदारी के बीच संतुलन को लेकर यह मामला महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब इस प्रकरण में सभी की निगाहें 15 अप्रैल को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं।

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