दमन के बजाए आधुनिक गुलामी खत्म करे सरकार
धारा लक्ष्य समाचार पत्र

लखनऊ। नोएडा श्रमिक आंदोलन में 400 श्रमिकों की गिरफ्तारी, उन्हें जेल भेजने, बर्बर दमन करने और अब उन पर रासुका लगाने की पुलिस प्रशासन द्वारा की गई घोषणा की ऑल इंडिया पीपुल्स फ्रंट ने कड़ी निंदा की है। एआईपीएफ की राष्ट्रीय कार्य समिति ने इसे लोकतंत्र के लिए अशुभ बताया है और सरकार से दमनकारी नीतियों पर रोक लगाने व आधुनिक गुलामी को खत्म करने का अनुरोध किया है।
एआईपीएफ ने कहा है कि देशी-विदेशी कॉर्पोरेट घरानों के मुनाफे के लिए मजदूर वर्ग को तबाह कर दिया गया है। मोदी सरकार ने सैकड़ों वर्षों के संघर्षों से हासिल अधिकारों को एक झटके में लेबर कोड लाकर खत्म कर दिया है। काम के घंटे बढ़ा दिए गए, फ्लोर लेवल वेज लाकर न्यूनतम मजदूरी के अधिकार को छीन लिया गया और फिक्सड टर्म इम्पलाइमेंट के द्वारा मजदूरों की हासिल न्यूनतम सामाजिक सुरक्षा भी समाप्त कर दी गई। स्थाई कामों में बेहद कम मजदूरी पर पूरी जिंदगी काम कराया जा रहा है। हायर और फायर की नीति के तहत मनमानी छंटनी कर दी जाती है। हालत इतनी बुरी है कि मजदूरों को साप्ताहिक अवकाश तक नहीं दिया जा रहा है।

बढ़ती भीषण महंगाई और वैश्विक संकट के कारण रोजगार के खत्म होने से मजदूरों में गहरी निराश एवं बेचैनी पैदा हुई है। असमानता लगातार बढ़ रही है और ज्यादतर मजदूर 10000 रूपए मासिक वेतन से कम पर अपने परिवार की जीविका चलाने के लिए मजबूर हुए हैं। इन परिस्थितियों में पूरे देश में मजदूर अपना प्रतिवाद दर्ज कर रहे हैं और नोएडा श्रमिक आंदोलन भी इसी की एक कड़ी है।
एआईपीएफ ने कहा है कि मजदूरों से संवाद करने और उनके संवैधानिक सवालों का लोकतांत्रिक शांतिपूर्ण समाधान करने की जगह सरकार दमन का रास्ता अपना रही है। मजदूरों के अधिकारों के संरक्षण के लिए ट्रेड यूनियन बनाने के संवैधानिक अधिकार और लेबर विभाग की भूमिका को बेहद कमजोर कर दिया गया है।
यह लोकतांत्रिक प्रणाली और संवैधानिक कल्याणकारी राज्य की अवधारणा के विरुद्ध है। इस पर हर हाल में रोक लगनी चाहिए। एआईपीएफ ने 24 अप्रैल को दिल्ली के राजेंद्र भवन में ‘भारत की विदेश व व्यापार नीति तथा कृषि, ऊर्जा, रोजगार व खाद्यान्न संकट’ पर आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में मजदूरों की आधुनिक गुलामी पर प्रस्ताव लेने और इस पर देश की सभी लोकतांत्रिक शक्तियों में एकता बनाने का फैसला लिया है।
