- पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: पहले चरण में रिकॉर्ड मतदान, भाजपा को संभावित बढ़त के संकेत
- उच्च मतदान ने बढ़ाई सियासी सरगर्मी, उत्तर बंगाल और जंगलमहल में भाजपा मजबूत, टीएमसी भी बरकरार मुकाबले में।
- वाराणसी/कोलकाता।पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के प्रथम चरण में रिकॉर्ड स्तर पर हुए मतदान ने राज्य की राजनीति को नए मोड़ पर ला खड़ा किया है। लगभग 90 प्रतिशत से अधिक मतदान केवल आंकड़ा नहीं, बल्कि मतदाताओं की बढ़ती राजनीतिक जागरूकता और सक्रिय भागीदारी का संकेत है। यह दर्शाता है कि इस बार जनता चुनाव को बेहद गंभीरता से ले रही है।
ऐतिहासिक दृष्टि से देखें तो बंगाल में अधिक मतदान अक्सर राजनीतिक बदलाव का संकेत रहा है। वर्ष 1977 में वाम मोर्चा का उदय और 2011 में तृणमूल कांग्रेस की सत्ता में वापसी, दोनों ही उच्च मतदान के दौर में हुए थे। ऐसे में 2026 का यह मतदान “परिवर्तन” की बहस को और तेज कर रहा है।
वर्तमान में राज्य की राजनीति मुख्यतः तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच केंद्रित हो चुकी है। जहां टीएमसी अपनी कल्याणकारी योजनाओं और महिला मतदाताओं के समर्थन पर भरोसा जता रही है, वहीं भाजपा सुशासन, सुरक्षा और भ्रष्टाचार विरोध जैसे मुद्दों के साथ चुनाव मैदान में है।
क्षेत्रीय विश्लेषण में उत्तर बंगाल भाजपा के लिए अनुकूल माना जा रहा है। दार्जिलिंग, जलपाईगुड़ी, कूचबिहार और अलीपुरद्वार जैसे जिलों में पार्टी की मजबूत पकड़ देखी जा रही है। वहीं जंगलमहल क्षेत्र—पुरुलिया, बांकुरा, पश्चिम मिदनापुर और झारग्राम—में भी भाजपा को बढ़त मिलने के संकेत मिल रहे हैं, जहां “मौन मतदाता” निर्णायक भूमिका निभा सकता है।
औद्योगिक क्षेत्रों जैसे आसनसोल, दुर्गापुर और बर्धमान में मुकाबला कड़ा है। यहां टीएमसी का संगठन मजबूत है, लेकिन भाजपा ने शहरी और युवा मतदाताओं के बीच प्रभाव बढ़ाया है। दूसरी ओर, मुर्शिदाबाद और मालदा जैसे मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में टीएमसी की स्थिति अपेक्षाकृत मजबूत बनी हुई है।
प्रथम चरण के समग्र आकलन के आधार पर अनुमान है कि कुल 152 सीटों में भाजपा 65 से 85 सीटों के बीच पहुंच सकती है, जबकि टीएमसी 60 से 75 सीटों तक सीमित रह सकती है। हालांकि यह अंतर बहुत बड़ा नहीं है, लेकिन राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि रिकॉर्ड मतदान केवल सत्ता विरोधी लहर नहीं, बल्कि दोनों प्रमुख दलों के समर्थकों की सक्रियता को भी दर्शाता है। ऐसे में अंतिम परिणाम आगामी चरणों के मतदान पर निर्भर करेंगे।
निष्कर्षतः, पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 का पहला चरण यह स्पष्ट संकेत दे रहा है कि राज्य की राजनीति अब एक नए और बेहद प्रतिस्पर्धी दौर में प्रवेश कर चुकी है, जहां मुकाबला कांटे का है और हर चरण निर्णायक साबित हो सकता है।
