जिला रिपोर्टर अनंत राय रायबरेली
रायबरेली/डीह- बीते दिनों 6 सितंबर को डीह थाने के दो सिपाहियों का सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल होता है जो पुलिसिया कार्यशैली पर प्रश्न चिन्ह खड़ा कर देता है और उस वीडियो को संज्ञान में लेते हुए बिना किसी जांच व पूछताछ के दो सिपाहियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया जाता है,
जब वास्तविकता की पड़ताल करने की कोशिश की जाती है तो पूरा मामला इस तरह निकालकर आता है विभिन्न सोर्सो से प्राप्त सटीक जानकारी के मुताबिक पुलिस मेस के दोनों टाइम सिर्फ दाल खा-खाकर ऊब जाने पर सिपाही रवि और आशू चौधरी द्वारा बाहर ढाबे पर खाना खाने जाया जाता है जिसमें रवि वर्दी में तो वही आसू सिविल ड्रेस में होता है,
प्राप्त जानकारी के मुताबिक ढाबा संचालक हिस्ट्रीशीटर होता है जिसके चलते पुलिसिया अभियान के तहत पुलिस कर्मियों का आयदिन वहां सत्यापन हेतु आना जाना रहता है जिस कारण से संचालक पुलिस से खफा रहते हैं और इसी के चलते दोनों सिपाहियों को देखकर उनके उच्चाधिकारियों को गाली देने व जेब में रखना के साथ साथ सिपाहियों को उनकी औकात दिखाने कि टोनिंग लगातार मारने लगते हैं,
जिसके चलते दोनों पक्षों के बीच तेज झड़प हो जाती है और उसी में ढाबा संचालक का खून भी निकल आता है वही बीच बचाव में लगे सिपाही रवि चौधरी के हाथो में उसका खून लग जाता है और चन्द लोगो द्वारा उसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया जाता है, जिससे लोग अपना-अपना अलग-अलग अर्थ निकलते हैं और जमकर दोनो सिपाहियों को टारगेट करते हैं और उन्हें मुक्तखोर घोषित करने की पुरजोर कवायत की जाती है जबकि अतीत के तमाम पेमेंट के ऐसे स्क्रीनशॉट भी प्रकाश आते जो उन सिपाहियों के मुफ्तखोरी के आरोपो को पूरी तरह से गलत साबित करता है,
पर शीर्ष में बैठे उच्चाधिकारियों द्वारा अपने ही सिपाही की एक न सुनते हुए तत्काल प्रभाव से दोनों को निलंबित कर देना बेहद चर्चाओं के माहौल को गर्म कर दिया, कप्तान साहब के पीआरओ की कार्यशैली पर भी प्रश्न चिन्ह खड़ा कर दिया जो कि वह कप्तान साहब को वास्तविकता से अवगत ना करा पाए वही दूसरी ओर तहरीर दाता द्वारा दिए गए सिपाही के खिलाफ तहरीर में भी मुफ्तखोरी के म शब्द का भी जिक्र नहीं दिखा जिससे सिपाहियों को टारगेट करने वाले लोगों के मंसूबों पर पानी फिर गया वहीं लोगों का मानना है की खाकी साजिशों का शिकार हो गई और उसे जमकर ट्रोल कर दिया गया।

