स्वयं सहायता समूह से जुड़कर आत्मनिर्भर बनीं अमेठी की तमन्ना बेगम
समूह से पहले की स्थिति – आर्थिक तंगी और संघर्ष
अमेठी। जनपद अमेठी के विकास खण्ड संग्रामपुर की ग्राम पंचायत कनू निवासी 33 वर्षीय तमन्ना बेगम की कहानी आत्मनिर्भरता की मिसाल है। 12वीं तक शिक्षा प्राप्त करने के बाद वे गृहणी के रूप में ही जीवन व्यतीत कर रही थीं। परिवार की आजीविका उनके पति की कोचिंग से चलती थी, लेकिन सीमित आय से जीवन-यापन कठिन था और आर्थिक स्थिति बेहद खराब थी।
*समूह से जुड़कर मिली नई दिशा*
जनवरी 2021 में तमन्ना बेगम अल्शमा महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं और अध्यक्ष का दायित्व संभाला। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें न केवल प्रशिक्षण व जानकारी मिली बल्कि पूंजी की व्यवस्था भी हुई। इससे उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव शुरू हुए।
*बीसी सखी बनीं और रोजगार का विस्तार*
वर्ष 2022 में ग्राम पंचायत में बीसी सखी पद हेतु भर्ती हुई, जिसमें आवेदन कर वे चयनित हुईं। तब से वे बीसी सखी के रूप में कार्य कर रही हैं और प्रतिमाह लगभग ₹6000-8000 की आय अर्जित कर रही हैं। इसके अतिरिक्त, वर्ष 2024 में उन्होंने पेपर प्लेट बनाने की मशीन खरीदी और स्वरोजगार शुरू किया। इस इकाई से वे स्वयं भी आय अर्जित कर रही हैं तथा समूह की अन्य महिलाओं को भी रोजगार उपलब्ध करा रही हैं। उनकी मासिक अतिरिक्त आय लगभग ₹4000-8000 तक पहुँच चुकी है।
*परिवार और समाज में बदलाव*
आज तमन्ना बेगम का परिवार सशक्त और आत्मनिर्भर है। पहले की आर्थिक कठिनाइयाँ अब समाप्त हो गई हैं और वे अपने ग्राम की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बन चुकी हैं।
जिलाधिकारी श्री संजय चौहान (आईएएस) एवं मुख्य विकास अधिकारी श्री सूरज पटेल (आईएएस) ने इस सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए जिला कार्यक्रम प्रबंधक, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीसी-एनआरएलएम) को निर्देशित किया है कि अधिक से अधिक महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ा जाए। साथ ही, गठित समूहों की आजीविका गतिविधियों में वृद्धि करने के लिए हरसंभव प्रयास सुनिश्चित किए जाएँ ताकि जनपद की और भी महिलाएँ आत्मनिर्भर बन सकें।

