धारा लक्ष्य समाचार पत्र
अमेठी। साहित्यिक संस्था गुंजन की ओर से देर शाम ‘श्रृंगार रस’ पर आधारित ऑनलाइन अंतर्राष्ट्रीय कवि सम्मेलन की शुरुआत स्वाति महेश्वरी के द्वारा गणेश वंदना तथा गुंजन की अध्यक्ष डॉ दीपा गुप्ता के द्वारा विशिष्ट अतिथियों के स्वागत से हुआ। दिल्ली से एडमिरल नूर द्वारा सुबह की चाय की चुस्की,
ओस्लो नॉर्वे से डॉ सुरेश चन्द्र शुक्ल- ओ पूनम का चांद ,वीना ने अमेरिका से जुड़कर अपनी रसभरी कविताओं से सभी को मंत्रमुग्ध किया। भारती ने कनाडा से -चलो आज फिर मिलकर चलते हैं,चिरमिरी से डॉ डी.के उपाध्याय – दिन ढलेगा तो फिर रात हो जाएगी,विशाखापट्नम से जूही -है आरज़ू इतनी सी ,वीरेंद्र ने -तेरी सोहबत में ,बैंगलोर से निगम राज ने -चांद आगोश में ,डॉ गिल ने -मुलाकातों का स्पंदन उ. प्र. से डॉ अर्जुन पाण्डेय – तूने दिल से पुकारा दिन से रात हो गई।
,डॉ शिवम् तिवारी -प्रेम की डगर कितनी दुरूह है,बलरामपुर से डॉ शिशुपाल गुप्त ने – प्रीत मुझको सिखाया न कर,डॉ दीपा गुप्ता ने -उठ ओ सजनी , विशाखापट्नम से डॉ मधुबाला कुशवाहा – फुरसत में बतियाना, कविता प्रस्तुत की तथा सभी के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। देश-विदेश से सभी साहित्यकारों ने अपनी प्रस्तुति से कार्यक्रम में चार चांद लगाए। कार्यक्रम का संचालन डॉ दीपा गुप्ता ने किया।

