धारा लक्ष्य समाचार पत्र
बाराबंकी, उत्तर प्रदेश: देश के अन्नदाताओं के लिए न्याय और सम्मान का सरकारी दावा बाराबंकी जिले में ध्वस्त हो गया है। रामसनेहीघाट तहसील के थोरथिया धान क्रय केंद्र पर क्रय केंद्र प्रभारी एम आई और प्रशासनिक अधिकारियों की खुलेआम गुंडागर्दी और मनमानी सामने आई है, जिसने किसानों के दर्द को चरम पर पहुंचा दिया है।

कुर्सी हिलाने वाला आरोप: सिस्टम पर कमीशन का ‘ग्रहण’ जिलाधिकारी (DM) शशांक त्रिपाठी के सख्त आदेशों के बावजूद, क्रय केंद्र पर व्यवस्था की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। केंद्र प्रभारी सुमन सिंह पर किसानों ने सीधा आरोप लगाया है कि वह ‘भ्रष्टाचार की भूखी भेड़िये’ की तरह व्यवहार कर रही हैं।
सूत्रों के मुताबिक, इस पूरे रैकेट में नीचे से ऊपर तक अधिकारियों के शामिल होने की आशंका है। जानकारी बताती है कि “पूरा सिस्टम ही कमीशन (रिश्वत) पर काम कर रहा है,” और इसी ‘रिश्वत के खेल’ से अधिकारियों के मुंह बंद कर दिए गए हैं, जिसके कारण कोई जांच या कार्रवाई नहीं हो पा रही है।
किसानों का दर्द: एक महीने की देरी, दलालों की ‘जी-हुजूरी’
पीड़ित किसानों का कहना है कि क्रय केंद्र बिचौलियों और दलालों का अड्डा बन गया है, जो चौबीसों घंटे प्रभारी की ‘जी हुजूरी’ करते हैं और बड़े व्यापारियों का धान प्राथमिकता पर तुलवाते हैं।
किसान राजकुमार ने बताया कि उन्होंने 19 नवंबर को कागजात जमा किए थे और 25 नवंबर की तौल तारीख मिली थी। लेकिन, 24 नवंबर को टोकन लेने पर प्रभारी ने बदसलूकी की और अब तौल की तारीख सीधे 19 दिसंबर कर दी गई है—यानी लगभग एक महीने की सीधी देरी!
दस्तावेज से खिलवाड़: किसानों ने यह भी खुलासा किया है कि केंद्र प्रभारी जानबूझकर रजिस्टर में किसानों के नाम दर्ज नहीं करती हैं, ताकि बाद में यह साबित किया जा सके कि किसान देरी से आए थे। यह ‘खेल’ स्पष्ट करता है कि किसानों के नाम पर बिचौलियों और पूंजीपतियों का धान खरीदने का एक बड़ा षड्यंत्र चल रहा है।
₹200 प्रति क्विंटल: काली कमाई का सनसनीखेज प्रमाण

नाम न छापने की शर्त पर एक किसान ने सनसनीखेज आरोप लगाया है कि धान की जल्द तौल कराने के लिए ₹200 प्रति क्विंटल की ‘रिश्वत’ ली जा रही है।
“जो किसान पैसा देता है, उसका धान तुरंत तोला जाता है। जो पैसे नहीं देता, उसका धान एक-दो महीने तक पेंडिंग में डाल दिया जाता है। यह सीधा लूट है।”
यह सीधा आरोप है कि केंद्र प्रभारी सुमन सिंह अपनी काली कमाई बढ़ाने के लिए दलालों और बड़े व्यापारियों को फायदा पहुंचाकर आय से अधिक संपत्ति अर्जित कर रही हैं।
प्रशासनिक लापरवाही पर तीखे सवाल
यह क्रय केंद्र SDM (सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट) कार्यालय से कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर है। इसके बावजूद, किसी भी जिम्मेदार अधिकारी ने कभी यहां निरीक्षण नहीं किया। यह प्रशासनिक उदासीनता, या फिर जानबूझकर की गई अनदेखी, कई गंभीर सवाल खड़े करती है:
क्या DM के आदेश केवल दिखावा थे? DM साहब, आपके आदेशों को भ्रष्ट नौकरशाहों द्वारा खुलेआम चुनौती दी जा रही है।
इस भ्रष्टाचार के जलजले को खत्म करने के लिए मुख्यमंत्री कार्यालय से सीधे हस्तक्षेप की जरूरत क्यों नहीं है?
केंद्र प्रभारी सुमन सिंह और संबंधित अधिकारियों की आय से अधिक संपत्ति की तत्काल जाँच क्यों नहीं शुरू की जाती?
किसानों के साथ हो रहे इस अमानवीय व्यवहार और प्रशासनिक गुंडागर्दी के खिलाफ राष्ट्रव्यापी आक्रोश व्याप्त है। सरकार को तत्काल एक्शन लेते हुए न केवल दोषी कर्मचारियों को बर्खास्त करना चाहिए, बल्कि इस सिस्टमैटिक लूट की उच्च-स्तरीय जांच कराकर किसानों को न्याय दिलाना चाहिए।
