New delhi news: ज्ञानी जैल सिंह शोषित वंचित तबको के राजनैतिक भागीदारी व आर्थिक विकास के प्रबल पक्षधर थे

धारा लक्ष्य समाचार 

पूर्व राष्ट्रपति की स्मृति में आयोजित राष्ट्रीय एकता व्याख्यान में महागठबंधन का शंखनाद, संगठित शक्ति ही महापुरुषों के सपनों को करेगा साकार: अशोक विश्वकर्मा

 

दिल्ली। ऑल इंडिया यूनाइटेड विश्वकर्मा शिल्पकार महासभा के तत्वावधान में भारत के सातवें राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह की पुण्य स्मृति में स्मरणाजंलि सभा एवं राष्ट्रीय एकता संगोष्ठी का आयोजन आज दिल्ली में संपन्न हुआ। ज्ञानी जैल सिंह की समाधि एकता स्थल राजघाट पर श्रद्धांजलि अर्पित की गई, तत्पश्चात पहाड़गंज स्थित विश्वकर्मा मंदिर में राष्ट्रीय एकता व्याख्यान हुआ।

ऑल इंडिया यूनाइटेड विश्वकर्मा शिल्पकार महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक कुमार विश्वकर्मा ने ज्ञानी जी की स्मृतियों को साझा करते हुए कहा कि ज्ञानीजी ने आजीवन सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। उनका व्यक्तित्व धार्मिक संस्कारों से परिपूर्ण था। उन्होंने गुलामी के खिलाफ संघर्ष किया और यातना सहते हुए अनेक बार जेल गए। फलस्वरूप उनका नाम जेल का पर्याय अर्थात जेल सिंह हो गया, जिसके चलते वह जैल सिंह के नाम से विख्यात हुए, जबकि उनका वास्तविक नाम जरनैल सिंह था।

ज्ञानीजी समाज के शोषित और वंचित तबकों के विकास के साथ उन्हें राजनैतिक, आर्थिक तथा प्रशासनिक व न्यायिक अधिकार देने के हिमायती थे। राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा समाज के सर्वांगीण विकास में आपसी बिखराव अभिशाप है। सामाजिक जागरूकता और संगठित शक्ति ही महापुरुषों के सपनों को साकार करेगा।

महासभा राष्ट्रीय स्तर पर सशक्त एकता और भागीदारी के लिए सामाजिक प्रतिनिधित्व वाले संगठनों का मुददो और विचारों के आधार पर समन्वय स्थापित कर राष्ट्रीय महागठबंधन बनाने की दिशा में कार्यरत है, जिसका शंखनाद आज देश की राजधानी दिल्ली से किया गया है।

व्याख्यान में अपने विचार व्यक्त करते हुए ज्ञानी जैल सिंह के पौत्र सरदार इंद्रजीत सिंह ने राजनीतिक भागीदारी और सर्वांगीण विकास के लिए विश्वकर्मा वंशीय सभी भाइयों के एकजुटता की आवश्यकता पर बल देते हुए एकता का आह्वान किया। समारोह के मुख्य अतिथि अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ओबीसी विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ अनिल जय हिंद ने कहा ज्ञानी जैल सिंह का राष्ट्रपति पद तक पहुंचना संविधान में मिले अधिकारों का ही चमत्कार है।

उन्होंने कहा ज्ञानी जी का सपना था की सत्ता की रोशनी समाज के गरीब और कमजोर वर्ग तक पहुंचना चाहिए। समाज के वंचित वर्ग के लोगों को भागीदारी के लिए संगठित होने की जरूरत है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी अनुसूचित जाति विभाग के अध्यक्ष व पूर्व मंत्री राजेंद्र पाल गौतम ने कहा विश्वकर्मा समाज का देश और समाज के विकास में महत्वपूर्ण योगदान है।

लेकिन अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि इस समाज के लोगों को इनका जायज है अधिकार हासिल नहीं हुआ और इस समाज के लोग आज भी भेदभाव के शिकार है। उन्होंने समता और सामाजिक न्याय के लिए समाज के लोगों को संगठित होकर संघर्ष करना पड़ेगा।

कार्यक्रम में प्रमुख रूप से महेंद्र सुथार,, हंसराज जांगीड़, गंगा दीन सुथार, चंदन विश्वकर्मा, डॉ प्रमोद कुमार विश्वकर्मा, रविंद्र विश्वकर्मा, कैलाश जांगिड़, भोला वर्मा, उमेश शर्मा, दिनेश विश्वकर्मा, भरत विश्वकर्मा, कैलाश विश्वकर्मा, मनसुख विश्वकर्मा, दुलीचंद विश्वकर्मा, उमा सुथार, गीता शर्मा, अर्चना शर्मा,एडवोकेटअरुण शर्मा, स्मिथ शर्मा, कुलदीप शर्मा, विशाल शर्मा,

अजय विश्वकर्मा, एडवोकेट आशीष विश्वकर्मा, इंजीनियर नागेंद्र विश्वकर्मा, सुभाष पांचाल, प्रेम प्रकाश विश्वकर्मा, नरेश आर्य पांचाल, बबीता विश्वकर्मा, भरत विश्वकर्मा , चेतन राम, ललित शर्मा, मैनपाल शर्मा, प्रवीण पांचाल, रविंद्र आर्य, दुलीचंद विश्वकर्मा सहित हजारों लोग उपस्थित थे। कार्यक्रम का संयोजन एवं धन्यवाद दीपेश शर्मा ने किया।

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