पक्के मकान और चारपहिया वाहन वालों को मिला लाभ, जरूरतमंद परिवारों के नाम सूची से काटे जाने का आरोप।
जिला रिपोर्टर रोहित मिश्रा रायबरेली से
धारा लक्ष्य समाचार पत्र
रायबरेली।राही ब्लॉक अंतर्गत ग्राम बेला खारा में प्रधानमंत्री आवास योजना के आवंटन को लेकर गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। गुरुवार को गांव के दर्जनों ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को शिकायती पत्र सौंपकर पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराए जाने की मांग की।ग्रामीणों का आरोप है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत लाभार्थियों के चयन में नियमों की अनदेखी करते हुए अपात्र लोगों को लाभ पहुंचाया गया है। शिकायतकर्ताओं के अनुसार जिन लोगों के पास पहले से पक्के मकान, पर्याप्त संसाधन और यहां तक कि चारपहिया वाहन तक मौजूद हैं, उनके नाम आवास योजना की सूची में शामिल कर दिए गए हैं। वहीं दूसरी ओर वास्तविक जरूरतमंद, गरीब और बेघर परिवारों को योजना के लाभ से वंचित रखा गया है
।ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पात्र लाभार्थियों के नाम जानबूझकर सूची से हटाए गए और उनकी जगह प्रभावशाली एवं अपात्र लोगों को शामिल कर लिया गया। इससे गांव में असंतोष और आक्रोश का माहौल बना हुआ है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि सरकार की महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य गरीबों को पक्का आवास उपलब्ध कराना है, लेकिन गांव में इसका लाभ वास्तविक पात्रों तक नहीं पहुंच पा रहा है।ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान राजेश कुमार सोनी पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि आवास आवंटन प्रक्रिया में मनमानी की गई और चयन में पारदर्शिता नहीं बरती गई। कुछ ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि प्रति आवास 10 हजार रुपये लेकर अपात्र लोगों को योजना का लाभ दिलाया गया है।
हालांकि इन आरोपों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।जिलाधिकारी को दिए गए ज्ञापन में ग्रामीणों ने मांग की है कि पूरे गांव में आवास लाभार्थियों का भौतिक सत्यापन कराया जाए तथा पात्र और जरूरतमंद परिवारों को प्राथमिकता के आधार पर योजना का लाभ उपलब्ध कराया जाए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि मामले की निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई तो वे आगे भी आंदोलन करने को मजबूर होंगे।अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस शिकायत को कितनी गंभीरता से लेते हुए जांच कराता है
और क्या वास्तव में योजना में हुई कथित अनियमितताओं का पर्दाफाश हो पाता है। ग्रामीणों की नजर अब प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई है।
