Lucknow News: श्रीमद्भ भागवत महापुराण कथा सुनकर श्रोता हुआ मंत्रमुग्ध

श्रीमद् भागवतपुराणकथा सुनने काफी दूरदराज से आए हजारों की संख्या में श्रद्धालु

कुलदीप कुमार (के.के.)

धारा लक्ष्य समाचार

लखनऊ। विधानसभा मोहनलालगंज क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम पंचायत बघौली पोस्ट केवली विकासखंड गोसाईगंज मैं लक्ष्मी नारायण यज्ञ एवं श्री मद भागवत महापुराण कथा संगीतमयी का का आयोजन अजय सिंह द्वारा अपने निज निवास पर किया गया। कथा व्यास माधवानंद जी महाराज अयोध्या धाम द्वारा आज भागवत महापुराण कथा में भागवत पुराण की उत्पत्ति की कहानी के बारे में कथावाचक द्वारा बताया गया। वही कथावाचक विकास माधवानंद महाराज द्वारा श्रीमद् भागवत महापुराण को संक्षिप्त रूप में श्रोताओं को सुनाते हुए कहा की इस प्रकार है: श्रीमद् भागवत कथा को सर्वप्रथम भगवान विष्णु ने ब्रह्मा जी को सुनाई थी। ब्रह्मा जी ने फिर इसे अपने पुत्र नारद जी को सुनाया। नारद जी ने यह कथा व्यास जी को बताई, और व्यास जी ने इसे अपने शिष्य शुकदेव जी को सुनाया, जिन्होंने राजा परीक्षित को यह कथा सुनाई।


विस्तार से:
विष्णु से ब्रह्मा:श्रीमद् भागवत कथा की शुरुआत भगवान विष्णु से होती है, जो इसे ब्रह्मा जी को चार श्लोकों में सुनाते हैं।

ब्रह्मा से नारद: ब्रह्मा जी अपने मनस पुत्र नारद जी को यह कथा सुनाते हैं।नारद से व्यास: नारद जी यह कथा व्यास जी को सुनाते हैं, जो इसे अपने शिष्य शुकदेव जी को बताते हैं।

शुकदेव से परीक्षित:
शुकदेव जी राजा परीक्षित को श्रीमद् भागवत कथा सुनाते हैं, जो कलयुग के राजा हैं और उन्हें श्राप से मुक्ति पाने के लिए यह कथा सुनी जाती है।
यह कथा राजा परीक्षित द्वारा शुकदेव जी से सुनी जाती है और यही भागवत पुराण की कहानी है।

भागवत पुराण की रचना:
भागवत पुराण की रचना को लेकर विद्वानों का मानना है कि यह संभवतः 10वीं शताब्दी के आसपास दक्षिण भारत के तमिल क्षेत्र में हुई थी। इस पुराण में भक्ति (धार्मिक भक्ति) की भावना, दक्षिण भारत के तमिल वैष्णव भक्ति कवियों, अलवारों की भावनात्मक उत्कंठा के समान है।

श्रीमद् भागवत पुराण का महत्व:
यह पुराण मोक्ष और ज्ञान प्रदान करने में महत्वपूर्ण माना जाता है।
यह भगवान विष्णु के अवतारों, विशेष रूप से कृष्ण के प्रति भक्ति को बढ़ावा देता है।
श्रीमद् भागवत पुराण को भगवान कृष्ण का साहित्यिक अवतार माना जाता है, और इसे सुनने से आध्यात्मिक विकास और भगवान के प्रति भक्ति गहरी होती है,

भागवत पुराण में राधा:
कुछ विद्वानों का मानना है कि भागवत पुराण में राधा का वर्णन सीधा नहीं है, बल्कि केवल व्याञ्जना द्वारा किया गया है, क्योंकि भागवत का मुख्य विषय कृष्ण प्रेम है और राधा उस प्रेम का साक्षात् रूप हैं। वही इस मौके पर सुरेंद्र सिंह, अखिलेश कुमार शर्मा मदारपुर , अंकुर सिंह, रामविकास सिंह , उत्सव सिंह आदित्य राज शर्मा, अतुल शर्मा (शरद) साहित्य दूर दराज से आए श्रद्धालु भाव विभोर हो गए । श्रीमद््भ्क्त्त् भागवत कथा के दूसरे दिन हजारोंंकी संख्या में माताओं बहनों वा क्षेत्र के सम्मानित जनों ने पहुंच कर कथा का आनंद लिया। तथा प्रसाद ग्रहण किया ।

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