Lucknow UP: लेखक ने क्या लिखा कविता”” ठोकर खाकर इंसान सजग हो जाता है 

धारा लक्ष्य समाचार पत्र  मनुष्य का स्वभाव इस तरह है कि जो साथ जाना है उसे छोड़ रहे हैं, जो यहीं रह जाना है हम सभी उसे जोड़ गाँठ कर जोड़ते जा रहे हैं।   प्रेम व विश्वास में एक ही समानता है, कि दो में से किसी को भी जबरदस्ती किसी में पैदा नहीं किया जा सकता है, यह तो वास्तविक स्वभाव में होता है।   मनुष्य का सबसे अच्छा मित्र, उसका अपना स्वास्थ्य होता है, जिस दिन स्वास्थ्य जवाब देता है, तो कोई मित्र साथ नहीं दे पाता…

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लेखक द्वारा ऐसे लिखी गई कविता नकारात्मक प्रचार

धारा लक्ष्य समाचार नकारात्मक खबरें फैलाने से लोगों की जाने भी कोविड से जा रहीं थी, स्थिति सामान्य न थी तो भी मृत्युदर एक से डेढ़ प्रतिशत के ऊपर न थी। मतलब यह कि जिन्हें पहले से कोई गंभीर बीमारी नही थी और जिन्होंने बहुत बाद में टेस्ट कराया, कोरोना से उनकी स्थिति भी खराब हो रही थी। पर सोशल मीडिया में लगातार मरने वालों की फोटो, श्मशान की फ़ोटो, मरने वालों की संख्या, अस्पतालों में जगह ना होने की बातें आ रही थीं। सरकार शासन पर आरोप प्रत्यारोप उन…

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दर्ज़ी का दार्शनिक अन्दाज़ लेखक के द्वारा लिखी गई ये कविता

प्रत्येक वस्तु को उसके महत्व के अनुसार ही उचित जगह मिलती है, उसी तरह जीवन में हर व्यक्ति को योग्यता अनुसार स्थान मिलती है।   देखा जाता है कि दर्ज़ी जब कैंची से कपड़े काटते हैं फ़िर कैंची को पैर के नीचे दबा कर रख लेते हैं, और फिर सुई से कपड़े सिलते हैं।   सिलाई के बाद वह सुई को अपनी टोपी में लगाकर सुरक्षित रख लेते हैं, एक दर्ज़ी से जब किसी ने यह पूछा, कि वह हर बार ऐसा क्यों करते हैं।   दर्ज़ी ने इस प्रश्न…

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ख़ुद ही मुद्दई, ख़ुद ही मुद्दालय कविता

ख़ुद ही मुद्दई, ख़ुद ही मुद्दालय, ख़ुद ही पुलिस ख़ुद न्यायालय, ख़ुद ही गवाह ख़ुद ही पैरोकारी, ख़ुद वकील ख़ुद जाँच अधिकारी।   जहाँ तक वह देख सकते हैं, वहाँ तक सब उनके आधीन, न कोई नियम न कोई क़ानून, जो वह कह दें वही है क़ानून।   न किसी का मान और न सम्मान, व्यर्थ के आरोप, व्यर्थ प्रत्यारोप, न कोई सबूत न कोई जानकारी, ज़्यादा जोश में मति गई है मारी।   यह कलियुग है धोखा प्रिय है, पर इसका प्रसाद बारी बारी से, हमको तुमको सबको मिलता…

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