धारा लक्ष्य समाचार पत्र
संग्रामपुर/अमेठी। भागवत कथा मर्मज्ञ आचार्य डाॅ राम कृपाल त्रिपाठी ने ग्राम मिसरौलीमाफी मे कथा की अमृत वर्षा की। वामन भगवान के अवतार का कथा मे मार्मिक चित्रण किया। कुल उत्तम है। जीवन सफल है। राजा बालि की कथा सुनाई। जान लगाकर कमाया धन उत्तम है। दान किसे कहते है। ऋषि निजकेता ने दान किए। बूढी गाय का दान किए। बेटे का दान दे रहे है।मृत्यु को दान दे रहे है। सोलह उपनिषद ह।
दान लेने वाला सन्तुष्ट हो जाए। पाप का बाप कौन है। बेशाया का अनाज धन ले ले। तो सौ स्वर्ण मुहर दूगी। खाना बनाकर खा लो। तो हजार स्वर्ण मुहर दूगी। मेरे हाथ से खाना खालो। लाख स्वर्ण मुहर दूगी। ब्राह्मण ने जब खाना खाना के लिए तैयारी की। बेशाया ने कहा मेरे हाथ से खाना खा लो। बहुत स्वर्ण मुहर दूगी। ब्राह्मण ने ज्यो बेशाया के हाथ से खाना चाहा।
तो बेशाया ने ब्राह्मण को थपड मारा। और कहा कि धर्म नष्ट नही करूगी। लालच ही पाप का बाप है। सच बोलकर धन नही कमाया जा सकता है। धन कमाने के लिए झूठ बोलना पडता है।आधा सच और आधा झूठ बोलकर कमाया धन बाणिज्य है। इस अवसर पर कार्यक्रम मे मुख्य यजमान पंडित गायत्री प्रसाद उपाध्याय पत्नी उमा देवी उपाध्याय, प्रधान करूणेश शुक्ल,लालता प्रसाद मिश्र उर्फ गाड,भगवत आचार्य पंडित
जय प्रकाश तिवारी,पूर्व प्रमुख शम्भू नाथ पाण्डेय,बिबेक कुमार तिवारी,पूर्व प्रधान कृष्ण मोहन त्रिपाठी,भाजपा किसान मोर्चा जिला उपाध्यक्ष राजेंद्र पाण्डेय,रणञ्जय इण्टर कालेज ठेंगहा प्रधानाचार्य जय प्रकाश दूबे,दिनेश कुमार शुक्ल,पंडित डाॅ केसरी तिवारी, उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मण्डल जिलाध्यक्ष हरिशंकर जायसवाल, गणेश प्रसाद कसौधन,राघवेन्द्र सिंह, सियाराम मिश्र, यज्ञनारायण उपाध्याय, प्रधान अशोक कुमार उपाध्याय उर्फ रज्जू उपाध्याय,
राघवेन्द्र सिंह, बिबेक कुमार मिश्र, घनश्याम शुक्ल, पूर्व प्रधान राम सुमेर गुप्ता,बीरेन्द्र कुमार तिवारी,बब्लू उपाध्याय, त्रियुगी नारायण तिवारी,
आदि भक्त रहे।

