धारा लक्ष्य समाचार पत्र
ड्रैगन फ्रूट उत्पादन से किसान की आय में उल्लेखनीय वृद्धि, सूक्ष्म सिंचाई योजना बनी सहायक
उद्यान विभाग की योजनाओं से जुड़कर आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कृषक : डीएम–सीडीओ
अमेठी। जनपद अमेठी के विकास खण्ड बाजार शुकुल अंतर्गत ग्राम मण्डवा निवासी कृषक चन्द्रशेखर पाण्डेय द्वारा पारंपरिक कृषि से आगे बढ़ते हुए ड्रैगन फ्रूट जैसी उच्च मूल्य वाली उद्यानिकी फसल को अपनाकर एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया गया है। कृषक द्वारा 0.50 हेक्टेयर क्षेत्रफल में ड्रैगन फ्रूट की खेती प्रारम्भ की गई, जिससे यह सिद्ध हुआ है कि वैज्ञानिक एवं नवाचार आधारित कृषि पद्धतियों से कम क्षेत्रफल में भी बेहतर उत्पादन एवं आय प्राप्त की जा सकती है।
उद्यान विभाग द्वारा संचालित “पर ड्रॉप मोर क्रॉप” माइक्रो इरीगेशन योजना के अंतर्गत कृषक के खेत में ड्रिप सिंचाई प्रणाली की स्थापना कराई गई। इस सूक्ष्म सिंचाई तकनीक के माध्यम से जल की बचत के साथ-साथ पौधों को संतुलित मात्रा में नमी उपलब्ध कराई गई, जिससे फसल की गुणवत्ता एवं उत्पादकता में निरंतर वृद्धि दर्ज की गई।
ड्रैगन फ्रूट की खेती के लगभग तीन वर्ष पश्चात प्रथम तुड़ाई में कृषक को संतोषजनक उत्पादन प्राप्त हुआ। इसके साथ ही कृषक द्वारा भूमि के अधिकतम उपयोग हेतु इण्टरक्रॉपिंग पद्धति अपनाते हुए बैंगन, टमाटर एवं हरी मिर्च की खेती भी की गई। फसल विविधीकरण से न केवल जोखिम में कमी आई, बल्कि आय के अतिरिक्त स्रोत भी विकसित हुए।
इस अवसर पर जिलाधिकारी अमेठी संजय चौहान, आईएएस ने कहा कि “जनपद में कृषकों को परंपरागत खेती से आगे बढ़ाकर उच्च मूल्य वाली उद्यानिकी फसलों से जोड़ना जिला प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल है। शासन की योजनाओं का सही उपयोग कर कृषक अपनी आय में स्थायी वृद्धि कर सकते हैं।” उन्होंने अन्य कृषकों से भी अपील की कि वे नवीन तकनीकों को अपनाकर कृषि को लाभकारी व्यवसाय के रूप में विकसित करें।
वहीं मुख्य विकास अधिकारी अमेठी श्री सचिन कुमार सिंह, आईएएस ने कहा कि “ड्रैगन फ्रूट जैसी फसलों एवं सूक्ष्म सिंचाई योजनाओं से किसानों की आय दोगुनी करने की दिशा में ठोस परिणाम सामने आ रहे हैं। जनपद में उद्यान, कृषि एवं संबंधित विभागों के समन्वय से कृषकों को तकनीकी मार्गदर्शन एवं योजनाओं का लाभ निरंतर उपलब्ध कराया जा रहा है।”
चन्द्रशेखर पाण्डेय की यह सफलता न केवल क्षेत्रीय कृषकों के लिए प्रेरणास्रोत बनी है, बल्कि यह भी प्रमाणित करती है कि यदि शासन की योजनाओं का समुचित उपयोग कर वैज्ञानिक दृष्टिकोण से कृषि कार्य किया जाए, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाया जा सकता है। जिला प्रशासन द्वारा भविष्य में भी इस प्रकार की नवाचार आधारित एवं आयवर्धक कृषि गतिविधियों को प्रोत्साहित किए जाने का संकल्प लिया गया है।

