काग़ज़ों में स्वच्छता, ज़मीनी हकीकत में भ्रष्टाचार? शौचालय, कचरा प्रबंधन व जागरूकता कार्यों में भारी अनियमितताओं का आरोप
धारा लक्ष्य समाचार पत्र

गोंडा।विकासखंड इटियाथोक तथा रूपईडीह अंतर्गत स्वच्छ भारत मिशन (एसबीएम) के तहत खर्च की गई सरकारी धनराशि को लेकर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं और फर्जी भुगतान के आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि योजनाओं के नाम पर लाखों–करोड़ों रुपये निकाल लिए गए, जबकि धरातल पर कार्य या तो हुए ही नहीं या फिर बेहद घटिया गुणवत्ता के पाए गए।
रूपईडीह ब्लॉक की कुरसहा, रूकमंगदपुर, निबिया परसपुर, तिर्रेमनोरमा, पचरन, दुल्हापुर पहाड़ी, खरगूपुर इमलिया, खरगूपुर डिंगुर, चौहट्टा, खनवापुर, मिश्रौलिया सहित कई ग्राम पंचायतों में तथा इटियाथोक ब्लॉक की बेलवा बहुता, बेलभरिया, भवानियापुर कला, बिनोहनी, बिशुनपुर संगम, हरदैंईया भटपुरवा, गूंगीदेई, लखनीपुर समेत अन्य पंचायतों में स्वच्छता एवं स्वास्थ्य मद में किए गए खर्च को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि शौचालय निर्माण, ठोस कचरा प्रबंधन, साफ-सफाई अभियान और स्वच्छता जागरूकता कार्यक्रमों के नाम पर काग़ज़ों में कार्य पूर्ण दिखाकर भुगतान करा लिया गया, जबकि कई स्थानों पर न तो शौचालय मौजूद हैं, न कचरा प्रबंधन की कोई व्यवस्था और न ही कोई प्रभावी जागरूकता अभियान दिखाई देता है।
कुछ ग्राम पंचायतों में लाभार्थियों के नाम पर भुगतान तो दर्शाया गया, लेकिन संबंधित ग्रामीणों को आज तक किसी भी प्रकार का वास्तविक लाभ नहीं मिला।
सोशल ऑडिट पर भी उठे सवाल, सीमित लोगों तक सिमटी सूचना
सूत्रों के अनुसार सोशल ऑडिट की प्रक्रिया पूरी तरह औपचारिकता बनकर रह गई। ऑडिट बैठकों की सूचना चुनिंदा लोगों तक ही सीमित रखी गई, जिससे आम ग्रामीणों की भागीदारी नहीं हो सकी। न तो खर्च का विस्तृत ब्यौरा सार्वजनिक किया गया और न ही कार्यों का समुचित भौतिक सत्यापन कराया गया।

आरोप यह भी हैं कि बिना स्थल निरीक्षण के ही बिल–वाउचर पास कर दिए गए, एक ही कार्य को अलग-अलग मदों में दिखाकर दोहरी निकासी की गई और ऑडिट के नाम पर केवल हस्ताक्षर व काग़ज़ी खानापूर्ति कर ली गई। ग्रामीणों का कहना है कि यदि सोशल ऑडिट निष्पक्ष, स्वतंत्र और पारदर्शी तरीके से कराया जाता, तो इस तरह के कथित फर्जीवाड़े सामने आ ही जाते।
ग्रामीणों की मांग: उच्चस्तरीय जांच, रिकवरी व सख्त कार्रवाई
मामले को लेकर ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि एसबीएम के अंतर्गत किए गए सभी भुगतानों की स्वतंत्र व उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
साथ ही प्रत्येक ग्राम पंचायत में कराए गए कार्यों का भौतिक सत्यापन, लाभार्थियों से सीधा संवाद, तथा सोशल ऑडिट रिपोर्ट को सार्वजनिक पोर्टल पर अपलोड किया जाए।
दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों और जिम्मेदारों से रिकवरी कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की भी मांग उठाई गई है।
एडीओ पंचायत का पक्ष
इस संबंध में एडीओ पंचायत गिरजेश पटेल ने बताया कि सोशल ऑडिट के लिए टीम आई थी। टीम द्वारा सभी संबंधित सचिवों की एक या दो ग्राम पंचायतों की फाइलों का ही ऑडिट किया गया। उन्होंने कहा कि समय और संसाधनों की सीमा के कारण सभी ग्राम पंचायतों का एक साथ ऑडिट कर पाना संभव नहीं होता।
जनता के भरोसे से जुड़ा मामला
फिलहाल यह मामला केवल सरकारी धन की पारदर्शिता तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वच्छता और जनस्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय उद्देश्यों की विश्वसनीयता से भी जुड़ा हुआ है। यदि समय रहते निष्पक्ष जांच और ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो योजनाओं के प्रति जनता का भरोसा कमजोर पड़ना तय माना जा रहा है।
