Varanasi UP….प्रो. निशा सिंह, वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर, उ० प्र० की विद्यापरिषद की सदस्य नामित।

प्रो. निशा सिंह, वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर, उ० प्र० की विद्यापरिषद की सदस्य नामित।

वाराणसी, वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर, की विद्या परिषद के पुनर्गठन में महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी के अंग्रेज़ी विभाग की प्रोफेसर निशा सिंह को सदस्य नामित किया गया है। यह मनोनयन उत्तर प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम, 1973 की धारा 25 (2) (XI) के अंतर्गत कुलपति महोदया के आदेश से किया गया है।

प्रो. निशा सिंह, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी के अंग्रेज़ी विभाग की पहली महिला प्रोफेसर एवं पहली महिला विभागाध्यक्ष रही हैं। वे वर्तमान में महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ की विद्या परिषद की सदस्य हैं तथा पूर्व में कार्य परिषद (Executive Council) की सदस्य के रूप में भी सेवाएँ दे चुकी हैं। इसके अतिरिक्त प्रो. निशा सिंह महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में महिला सशक्तिकरण प्रकोष्ठ की नोडल अधिकारी के रूप में भी कार्यरत हैं‌ तथा प्रो० सिंह को अभी हाल ही में डा० राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय, अयोध्या की विद्यापरिषद का सदस्य भी नामित किया गया है।
प्रो. निशा सिंह ने अंग्रेजी एवं अन्य विदेशी भाषा विभाग की विभागाध्यक्ष रहते हुए विभागीय एवं अकादमिक स्तर पर अनेक नवोन्मेषी पहले की तथा फ्रेंच, जर्मन, स्पेनिश एवं स्पोकेन इंग्लिश की शुरुआत भी किया हैं। प्रो० सिंह ने विश्वविद्यालय में विभिन्न प्रशासनिक दायित्वों का भी सफलतापूर्वक निर्वहन किया है।

प्रोफेसर निशा सिंह शोध पद्धति एवं उच्च शिक्षा में सुधार जैसे विषयों पर देश के विभिन्न विश्वविद्यालय एवं अकादमी मंचों पर 145 से अधिक विषयों पर भी व्याख्यान दे चुकी हैं एकेडमिक योगदान के तहत कई पुस्तकों का लेखन, 50 से अधिक शोध पत्रों का प्रकाशन तथा इनके निर्देशन में अब तक 11 सदस्यों को पीएचडी उपाधि प्राप्त होना उल्लेखनीय है। इसके अतिरिक्त प्रोफेसर सिंह ने अभी हाल ही में दिनांक 10 जनवरी से 12 जनवरी, 2026 तक 68वें ऑल इंडिया इंग्लिश टीचर्स काॅन्फ्रेंस का सफलतापूर्वक आयोजन भी किया।

प्रो० सिंह के शोध एवं अकादमिक प्रशासन के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान को देखते हुए उन्हें वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय की विद्या परिषद में शामिल किया गया है। उनके नामांकन से विश्वविद्यालय की शैक्षणिक नीतियों, पाठ्यक्रम विकास एवं अकादमिक गुणवत्ता को सुदृढ़ दिशा मिलने की अपेक्षा व्यक्त की जा रही है। शिक्षाविदों एवं विश्वविद्यालय परिवार ने उनके इस मनोनयन पर हर्ष व्यक्त किया है।

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