महात्मा गांधी का जीवन आदर्श आज भी प्रासंगिक,अशोक विश्वकर्मा।
विश्वकर्मा महासभा ने महात्मा गांधी को पुण्यतिथि पर अर्पित की श्रद्धांजलि।
वाराणसी ऑल इंडिया यूनाइटेड विश्वकर्मा शिल्पकार महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक कुमार विश्वकर्मा ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को पुण्यतिथि पर नमन करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा भारत की आजादी में महात्मा गांधी की भूमिका सर्वविदित है भले ही वह आज हमारे बीच नहीं है लेकिन उनकी विचारधारा वर्तमान परिस्थितियों में भी उतनी ही प्रासंगिक है। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी का जीवन सत्य, अहिंसा, ईमानदारी, और सादगी का प्रेरक उदाहरण है, जो आज भी प्रासंगिक है। गांधीजी का मानना था कि क्षमा करना कमजोर नहीं, बल्कि बलवानों का गुण है। एक बार उनके एक अनुयायी ने किसी को थप्पड़ मार दिया, तो गांधीजी ने उसे गलती सुधारने और माफी मांगने के लिए प्रेरित किया। वह सादगी के प्रतिमान थे और हमेशा गरीबों के प्रति सहानुभूति रखते थे।गांधीजी ने हमेशा छुआछूत और भेदभाव को खत्म करने पर जोर दिया।उन्होंने लोगों को आत्मनिर्भर बनने के लिए चरखा चलाने और स्वदेशी अपनाने की प्रेरणा दी।उनके जीवन का संदेश था कि “आप दुनियां में जो बदलाव देखना चाहते हैं,वह पहले खुद में लाएं”।

