Varanasi UP…मानव संपदा पोर्टल पर संपत्ति विवरण की अनिवार्यता और वेतन रोकने की कार्रवाई की मांग।

मानव संपदा पोर्टल पर संपत्ति विवरण की अनिवार्यता और वेतन रोकने की कार्रवाई की मांग।

महासंघ की प्रमुख मांग समयसीमा में एक माह का विस्तार।

महासंघ ने संपत्ति विवरण के अलावा कई अन्य लंबित मांगों को भी दोहराया।

वाराणसी। उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी महासंघ ने वाराणसी में मानव संपदा पोर्टल पर चल-अचल संपत्ति विवरण अपलोड करने की समयसीमा बढ़ाने की मांग को लेकर एडीएम सप्लाई को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा है। यह मांग 31 जनवरी 2026 की डेडलाइन बीतने के बाद की गई है, जिसके कारण हजारों कर्मचारियों का जनवरी वेतन रोका गया है। उत्तर प्रदेश सरकार ने सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली, 1956 के नियम 24 के तहत सभी राज्य कर्मचारियों को 31 दिसंबर 2025 तक अर्जित अपनी चल-अचल संपत्ति का विवरण मानव संपदा पोर्टल पर 31 जनवरी 2026 तक अपलोड करने का आदेश दिया था। मुख्य सचिव एसपी गोयल के निर्देश पर समयसीमा न मानने वाले कर्मचारियों (विभिन्न रिपोर्टों में 47,816 से 68,236 तक) का जनवरी 2026 का वेतन रोका गया है। आगे अनुशासनात्मक कार्रवाई, प्रमोशन रोक और विभागीय जांच का भी प्रावधान है। यह कदम पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है, लेकिन कर्मचारी संगठनों ने इसे सख्ती बताया है। उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी महासंघ ने शासन के 2 फरवरी 2026 के पत्र (संख्या 33/स्तालिन-का-5-2026-(1838120)) का हवाला देते हुए मांग की है कि व्यस्तताओं (जैसे शिक्षकों पर SIR कार्य, परीक्षा मूल्यांकन, प्री-बोर्ड और ग्रह परीक्षाएं) को देखते हुए सभी कर्मचारियों को कम से कम एक अतिरिक्त माह का समय दिया जाए। इससे कर्मचारी बिना दबाव के विवरण अपलोड कर सकेंगे। महासंघ ने हजारों प्रभावित कर्मचारियों (शिक्षक, लिपिक आदि) की स्थिति पर ध्यान दिलाया है। ज्ञापन एडीएम सप्लाई को सौंपा गया, जिसमें मुख्यमंत्री से सहानुभूतिपूर्ण विचार की अपील की गई है। सभी कॉन्ट्रैक्ट/आउटसोर्स/डेली वेज कर्मचारियों को रेगुलर करना और ऐसी नौकरियां बंद करना। खाली पदों को रेगुलर बेसिस पर भरना, नपीएस/यूपीएस खत्म कर ओपीएस बहाल करना, पफरदा एक्ट रद्द करना। इपीएस-95 सब्सक्राइबर्स को डिफाइंड बेनिफिट पेंशन में लाना, चार लेबर कोड रद्द करना, पीएसयू प्राइवेटाइजेशन रोकना, 5वीं-8वीं वेतन आयोग की समीक्षा, अंतरिम राहत के रूप में बेसिक पे का 10% (कम से कम ₹5000) देना, हर 5 साल में पेंशन रिविजन, कैशलेस हेल्थ इंश्योरेंस स्कीम लागू करना व नेप खत्म करना, टेट अनिवार्यता वापस लेना, आदि।
ज्ञापन सौंपने के दौरान उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी महासंघ वाराणसी इकाई के प्रमुख पदाधिकारी मौजूद रहे, जिनमें जितेंद्र कुमार श्रीवास्तव (जिलाध्यक्ष), संजय तिवारी (कार्यकारी अध्यक्ष), शैलेश कुमार (जिलामंत्री), राजेश कुमार कुशवाहा (जिला वरिष्ठ उपाध्यक्ष), शिव शंकर यादव (जिला उपाध्यक्ष), शैलेश कुमार (जिला संगठन मंत्री), वेवी कुमारी (जिला संगठन मंत्री महिला), आनंद प्रकाश पाठक (जिला संयुक्त मंत्री), सुनील कुमार (जिला वित्त मंत्री), जवाहिर यादव (जिला सम्प्रेक्षक) सहित अन्य शामिल थे। यह कदम राज्यभर में कर्मचारी संगठनों के संघर्ष का हिस्सा है।

Related posts