Varanasi UP…महर्षि दयानन्द सरस्वती जी के 202वें जयन्ती पर हुआ यज्ञ व प्रसाद वितरण ।

महर्षि दयानन्द सरस्वती जी के 202वें जयन्ती पर हुआ यज्ञ व प्रसाद वितरण ।वाराणसी वेद एवं सनातन वैदिक धर्म के यथार्थ प्रवक्ता व सशक्त ध्वजवाहक, स्वराज के प्रथम मंत्र द्रष्टा, महान गौ रक्षक, ‘वेदों की ओर लौटो’ के महान उ‌द्घोषक, सामाजिक व धार्मिक क्षेत्र में समतामूलक समाज के पुनर्प्रवर्तक एवं उन्नीसवीं सदी के नवजागरण के पुरोधा महर्षि दयानन्द सरस्वती जी की दोसौवीं जयन्ती के उद्घाटन पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने दो वर्ष तक मनाने का आह्वान किया था व कहा था कि महर्षि दयानन्द सरस्वती ‘विश्वऋषि’ के साथ-साथ ‘राष्ट्रीय ऋषि’ थे, जिन्होंने भारतीय संस्कृति के गौरव को पुनः स्थापित किया । दयानन्द जी ने उस समय वेदों का मार्ग दिखाया जब भारतीय अपनी परम्परा को भूल रहे थे । इसी आवाह्न के तहत जिला आर्य प्रतिनिधि सभा वाराणसी के निर्देश पर सभी समाजों में प्रातः कालीन यज्ञ व प्रसाद वितरण के पश्चात् सिगरा स्थित लाल बहादुर शास्त्री पार्क के समीप जिला आर्य प्रतिनिधि सभा के तत्वावधान में आर्य समाज लल्लापुरा व आर्य समाज भोजूवीर के सहयोग से महर्षि के द्विशतोत्तर जयंती के दोसौदोवें जयन्ती के अवसर पर सिगरा स्थित लाल बहादुर शास्त्री पार्क के समीप यज्ञ के पश्चात् ऋषि चर्चा व प्रसाद वितरण का कार्यक्रम हुआ ।इस यज्ञ का अनुष्ठान जिला सभा के प्रधान प्रमोद आर्य आर्षेय के आचार्यत्व व यजमान सी.ए. विष्णु प्रसाद के साथ सभी समाज से उपस्थित पदाधिकारियों व सदस्यों के साथ सम्पन्न कराया ।प्रधान ने ऋषि चर्चा में कहा कि माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी के स्वामी जी के बारे में यह विचार कि स्वामी दयानन्द महाभारत के बाद के युग में सबसे महान योगी, वेद ज्ञानी, ईश्वरभक्त और समाज सुधारक थे । उन्होंने ‘वेदों की ओर लौटो’ का नारा देकर समाज में नई जागृति पैदा की । समाज से छुआ-छूत, ऊँच-नीच के भेदभाव को दूर करने और सभी को (दलितों व महिलाओं सहित) वेदाध्ययन का अधिकार दिलाया को स्मरण करते हुए ऋषि ऋण से उऋण होने का चर्चा किया । सी.ए. विष्णु प्रसाद ने कहा कि ऋषि के अमर ग्रन्थ सत्यार्थ प्रकाश को पढ़कर ही सत्य सनातन वैदिक धर्म के पथ पर चला जा सकता है । प्रद्युम्न आर्य ने ऋषि गीत की प्रस्तुति दी ।इस कार्यक्रम में मंत्री रवि प्रकाश आर्य, कोषाध्यक्ष प्रदीप आर्य, चन्द्रपाल आर्य, आर्य रवि प्रकाश बरनवाल, राजकुमार वैद्य, चन्द्रदीप आर्य, सुशील आर्य, डॉक्टर अनिल मित्रा, गोपाल आर्य, कृष्ण कुमार आर्य, अखिलेश आर्य, सूरज प्रकाश बरनवाल, अधिवक्ता विन्ध्वासिनी पाठक, वेद प्रकाश बृजवासी, वेद प्रकाश आर्य, विजय आर्य, सत्येंद्र आर्य आदि लोग उपस्थित रहे ।

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