पत्नी के पेट में 8 माह का गर्भ, पीड़ित ने एसपी से लगाई न्याय की गुहार
जिला रिपोर्टर रोहित मिश्रा रायबरेली
धारा लक्ष्य समाचार पत्र
रायबरेली।डीह माता-पिता अपनी बेटी का विवाह बड़े ही अरमान एवं शान शौकत से करते हैं अपनी हैसियत से ज्यादा करने की कोशिश करते हैं लेकिन समाज में दहेज के लोभी मन मुताबिक दहेज न मिलने पर ससुराल पक्ष के लोग लगातार विवाहिता को शारीरिक, मानसिक प्रताड़ना देने से जरा सा भी गुरेज नहीं करते । विवाह पति-पत्नी के बीच एक पवित्र रिश्ता है लेकिन दहेज के लोभी लगातार इस पवित्र रिश्ते को कलंकित कर रहे हैं ।
ऐसा ही मामला जनपद रायबरेली में देखने को मिला है जहां पर दहेज के लोभी विवाहिता को तरह-तरह की यातनाएं दिया । अंत में दहेज की मांग पूरी न होने पर पति ने पति को पत्नी होने से भी इंकार कर दिया, जबकि पत्नी के पेट में 8 माह का गर्भ भी है । पति का कहना है कि मेरा बच्चा नहीं है । माता-पिता ने अपनी बेटी को न्याय दिलाने के लिए पहुंचा एसपी ऑफिस। पुलिस अधीक्षक से लगाई न्याय की गुहार।
मिली जानकारी के अनुसार आशा पुत्री उदय राज निवासी पुरे चकधारी मजरे जगदीशपुर थाना डीह जनपद रायबरेली का विवाह पूरे रीति रिवाज के अनुसार 25 अप्रैल 2025 को रंजीत कुमार पुत्र राजकुमार निवासी पुरे भवन शाह मजरा ताला गोपालपुर थाना भदोखर जिला रायबरेली के साथ हुई । शुरुआत से ही दहेज को लेकर रंजीत एवं माता-पिता लगातार प्रताड़ित कर रहे थे लेकिन आशा ने कभी भी अपने मां-बाप से इसकी शिकायत नहीं की ।
लेकिन आशा का सब्र लगातार प्रताड़ित सहने के बाद टूट गया और अपने मां-बाप से शिकायत की । ससुराल वाले 2 लाख की मांग कर रहे हैं यदि 2 लाख नहीं दोगे तो आपकी बेटी जान से हाथ धो लेगी, क्योंकि ससुराल पक्ष के लोग हमें लगातार प्रताड़ित कर रहे हैं कि यदि 2 लाख नहीं दिया तो तुम्हें जान से मार कर नदी में फेंक दूंगा ।
जबकि माता-पिता गरीब होने के बावजूद भी अपनी हैसियत से ज्यादा दहेज के रूप में 2 लाख नगद, सोने की चेन, सोने की अंगूठी, सोने की सलाई, वाशिंग मशीन, कलर टीवी,अलमारी, बरतन तथा अन्य सामान दिया फिर भी ससुरार पक्ष दहेज की मांग लगातार पुनः कर रहे हैं । इसके पूर्व भी पीड़ित ने थाने में प्रार्थना पत्र दिया था ।
जहां ससुरार पक्ष के लोगो ने कहा था कि भविष्य में ऐसी गलती दोबारा नहीं होगी । लेकिन पति रंजीत द्वारा मर्यादा की सारी हदें पार करते हुए कह रहा है कि हमारी आशा से शादी ही नहीं हुई हम इनको जानते ही नहीं, गर्भ में जो बच्चा है वह मेरा है ही नहीं । फिलहाल पीड़ित ने महिला थाने जाकर सुलह समझौता करने की कोशिश किया । महिला थाने से रंजीत को फोन किया जाता है।
जिसमें रंजीत ने फोन पर ही कहा कि हम आशा को नहीं जानते आपको जो करना है कर दीजिए। मुकदमा लिखवाना है वह लिखवा दीजिए । हमें कोई फर्क नहीं पड़ता । हमारा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। फिलहाल पीड़ित को एसपी ऑफिस भेजा गया जहां पर संबंधित थाने को प्रार्थना पत्र भेजा गया।
देखना यह है कि पीड़ित को न्याय मिलता है कि ऐसे ही दर-दर की ठोकरे खाने को मिलता है जबकि पीड़ित के पेट में 8 माह का गर्भ है। पीड़ित को कैसे और कब न्याय मिलता है यह तो आने वाला समय ही तय करेगा ??
