ओई की रहस्यमयी सुरंग की गुत्थी सुलझाने में जुटी एएसआई, तीसरे दिन भी चली गहन पड़ताल

जिला रिपोर्टर रोहित मिश्रा रायबरेली

धारा लक्ष्य समाचार पत्र

रायबरेली। हरचंदपुर क्षेत्र के ओई गांव में बारिश के बाद जमीन धंसने से सामने आई रहस्यमयी सुरंग और प्राचीन अवशेषों की जांच अब निर्णायक चरण में पहुंचती दिखाई दे रही है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की सात सदस्यीय विशेष टीम ने शनिवार को लगातार तीसरे दिन मौके पर पहुंचकर सुरंग, टीले और मिले ऐतिहासिक साक्ष्यों का गहन अध्ययन किया।डॉ. राजेंद्र यादव के नेतृत्व में पहुंची टीम इस बार सुरंगनुमा गड्ढे के भीतर उतरकर उसकी संरचना का बारीकी से निरीक्षण करती रही।

विशेषज्ञों ने सुरंग की दीवारों, मिट्टी की विभिन्न परतों तथा अन्य पुरातात्विक संकेतों का सूक्ष्म परीक्षण किया, ताकि इसके निर्माण, कालखंड और ऐतिहासिक महत्व का सही आकलन किया जा सके।इसके बाद एएसआई अधिकारियों ने सुरंग के समीप स्थित प्राचीन टीले का भी विस्तृत सर्वेक्षण किया। जांच के दौरान मिले कई महत्वपूर्ण अवशेषों को टीम ने अपने कब्जे में लेकर वैज्ञानिक परीक्षण के लिए सुरक्षित कर लिया है।

माना जा रहा है कि इन अवशेषों से क्षेत्र के प्राचीन इतिहास से जुड़े अहम तथ्य सामने आ सकते हैं।जांच के दौरान उपजिलाधिकारी महराजगंज चंद्र प्रकाश गौतम, क्षेत्राधिकारी महराजगंज प्रदीप कुमार, राजस्व विभाग की टीम तथा भारी पुलिस बल मौके पर मौजूद रहा। पूरे क्षेत्र को सुरक्षा घेरे में रखते हुए जांच प्रक्रिया को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराया गया।एएसआई की टीम गांव निवासी अशोक प्रताप मौर्य के घर भी पहुंची, जहां वर्ष 1985 से सुरक्षित रखे गए प्राचीन अवशेषों का पुनः परीक्षण किया गया।

विशेषज्ञों ने इन पुरावशेषों का अवलोकन कर आवश्यक जानकारियां एकत्र कीं और उनके ऐतिहासिक महत्व का प्रारंभिक आकलन किया।

उल्लेखनीय है कि कुछ दिन पूर्व लगातार बारिश के बाद ओई गांव के एक खेत में जमीन धंसने से यह सुरंगनुमा संरचना सामने आई थी। शुरुआती जांच में कुषाणकाल से जुड़े अवशेष मिलने के संकेत मिलने के बाद एएसआई ने मामले को गंभीरता से लेते हुए विस्तृत जांच शुरू की। अब क्षेत्रवासियों समेत इतिहासकारों की निगाह एएसआई की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी है, जिससे इस रहस्यमयी सुरंग और यहां मिले प्राचीन अवशेषों के इतिहास से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आने की उम्मीद है।

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