राहुल गांधी का काफिला गुजरा, इंतजार करते रह गए बाढ़ पीड़ित और कार्यकर्ता

रिपोर्टर रोहित मिश्रा रायबरेली

धारा लक्ष्य समाचार पत्र

महराजगंज, रायबरेली। कांग्रेस सांसद एवं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के रायबरेली दौरे को लेकर क्षेत्र में सुबह से ही उत्साह का माहौल था। हैदरगढ़ मार्ग से महराजगंज होते हुए उनके गुजरने की सूचना पर बाढ़ प्रभावित गांवों के लोग और कांग्रेस कार्यकर्ता बड़ी संख्या में सड़क किनारे एकत्र हो गए। लोगों को उम्मीद थी कि राहुल गांधी रुककर उनकी समस्याएं सुनेंगे, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था और समयबद्ध कार्यक्रम के चलते अधिकांश स्थानों पर काफिला बिना रुके आगे बढ़ गया।मंगलवार को राहुल गांधी का काफिला हलोर बाजार स्थित यूको बैंक के निकट कुछ मिनट के लिए रुका।

यहां मौजूद कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया और फूल-मालाएं भेंट कीं। राहुल गांधी ने वाहन से ही कार्यकर्ताओं का अभिवादन स्वीकार किया, जिसके बाद काफिला आगे रवाना हो गया।

आगे कुबना गांव के पास कोटवा मदनिया क्षेत्र में बाढ़ प्रभावित ग्रामीण बड़ी संख्या में अपनी समस्याएं लेकर खड़े थे। भीड़ को देखते हुए काफिला कुछ देर के लिए रुका। राहुल गांधी ने वाहन से ही ग्रामीणों का अभिवादन किया और उनकी समस्याओं के समाधान का भरोसा दिलाया। हालांकि, अधिकांश ग्रामीण अपनी बात विस्तार से नहीं रख सके।

सबसे अधिक निराशा मोन गांव के मजरे लालगंज के बाढ़ पीड़ितों को हुई। ग्रामीण दोपहर से ही सड़क किनारे राहुल गांधी के इंतजार में खड़े थे। जैसे ही काफिला वहां पहुंचा, वाहन कुछ क्षण के लिए धीमे हुए, लेकिन बिना रुके आगे बढ़ गए। इससे ग्रामीणों को अपनी समस्याएं सीधे सांसद तक पहुंचाने का अवसर नहीं मिल सका।

उधर, महराजगंज मुख्य तिराहे पर राहुल गांधी की एक झलक पाने के लिए हजारों लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। चौराहे के आसपास की दुकानों, मकानों की छतों और बालकनियों पर भी लोग खड़े दिखाई दिए। भारी भीड़ के कारण यातायात व्यवस्था प्रभावित रही और काफी देर तक जाम की स्थिति बनी रही। कार्यकर्ता हाथों में मालाएं और स्मृति चिह्न लिए खड़े रहे, लेकिन सुरक्षा घेरे के चलते अधिकांश लोग राहुल गांधी से मुलाकात नहीं कर सके।

राहुल गांधी के दौरे को लेकर पूरे मार्ग पर प्रशासन और पुलिस बल पूरी तरह सतर्क रहा। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए कई स्थानों पर काफिले को बिना रुके आगे बढ़ाया गया। वहीं, बाढ़ पीड़ितों और कार्यकर्ताओं के बीच यह चर्चा बनी रही कि यदि उन्हें कुछ समय मिल जाता तो वे अपनी समस्याएं सीधे सांसद के सामने रख सकते थे।

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