बैंक डकैती और 2 सुरक्षाकर्मियों की हत्या का मुकदमा धड़ाम, चार आरोपी बरी
अभियोजन आरोप साबित करने में नाकाम, अधिवक्ता मोहम्मद उमर मुख्तार की ठोस दलीलों से पीड़ितों को मिला न्याय
धारा लक्ष्य समाचार पत्र
बाराबंकी। जिला सहकारी बैंक में डकैती और ड्यूटी पर तैनात दो सुरक्षाकर्मियों की हत्या के करीब दस साल पुराने मामले में अदालत ने चार आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया। अपर सत्र न्यायाधीश न्यायालय संख्या-02 के न्यायाधीश असद अहमद हाशमी ने सुनवाई के बाद अभियोजन साक्ष्यों को आरोप सिद्ध करने के लिए पर्याप्त नहीं माना और आरोपियों को संदेह का लाभ दिया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार मामला थाना कोतवाली नगर से संबंधित है, अभियोजन के मुताबिक पांच अप्रैल 2016 को जिला सहकारी बैंक परिसर में डकैती की वारदात हुई थी। आरोप था कि डकैती के दौरान सुरक्षाकर्मियों से मारपीट कर उनकी हत्या कर दी गई और बैंक का डीबीआर भी उठा ले जाया गया। पुलिस विवेचना के बाद कलीम कुरैशी, सरवर, पंकज वर्मा, वहाजउद्दीन उर्फ बादशाह और नाज मोहम्मद उर्फ लोली के खिलाफ धारा 396 और 412 आईपीसी में आरोप पत्र दाखिल किया गया था। नाज मोहम्मद की पत्रावली अलग कर दी गई।
मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन ने गवाह पेश किए, लेकिन अदालत के मुताबिक मुख्य परीक्षा और प्रतिपरीक्षा में ऐसे स्पष्ट और भरोसेमंद साक्ष्य सामने नहीं आए, जिनसे आरोपियों की घटना में संलिप्तता साबित हो सके। गवाहों के बयानों में भी असंगतियां सामने आईं। केस की एक अहम कड़ी एफएसएल रिपोर्ट भी अदालत तक नहीं पहुंच सकी। बरामद माल और हथियारों से संबंधित विधि विज्ञान प्रयोगशाला की रिपोर्ट न तो प्रस्तुत की गई और न ही उसे साक्ष्य के रूप में साबित कराया गया।
अभियोजन को आरोप अपने साक्ष्यों के आधार पर संदेह से परे सिद्ध करना होता है और संदेह का लाभ अभियुक्त को मिलता है। बचाव पक्ष के अधिवक्ता मोहम्मद उमर मुख्तार ने बताया कि मेरे मुवक्किलों को आज न्यायालय द्वारा बाइज्जत बरी किया गया। इन परिस्थितियों में अदालत ने कलीम कुरैशी, सरवर, पंकज वर्मा और वहाजउद्दीन उर्फ बादशाह को सभी आरोपों से दोषमुक्त कर दिया।
हमारी कोशिश रहती है कि कोई भी निर्दोष व्यक्ति को सजा न मिले, इसके लिए हम कड़ी मेहनत करके इंसाफ दिलाने की पूरी कोशिश करते रहते हैं।
