धारा लक्ष्य समाचार पत्र
बाराबंकी।तहसील रामसनेहीघाट क्षेत्र में अवैध मिट्टी खनन पर समाचार पत्र में खुलासा होने के बाद भी अगर कार्रवाई शून्य हो, तो यह लापरवाही नहीं बल्कि संरक्षण की गंध देता है। रामसनेहीघाट तहसील क्षेत्र में चल रहा सददवापुर इब्राहिमाबाद जेठबनी से निकलती हैं ट्राली अवैध मिट्टी खनन अब प्रशासन के लिए चुनौती नहीं, बल्कि उसकी साख पर सीधा हमला बन चुका है।
सद्दवापुर, इब्राहिमाबाद और आसपास के इलाकों में ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की कतारें आज भी उसी रफ्तार से दौड़ रही हैं, मानो कानून नाम की कोई चीज़ वहां है ही नहीं। दिन हो या रात, मिट्टी की लूट बदस्तूर जारी है और जिम्मेदार अधिकारी कुंभकर्णी नींद में सोए हुए हैं। सबसे हैरानी की बात यह है कि खबर प्रकाशित होने के बाद भी न तो किसी ट्रॉली को सीज किया गया, न किसी पर एफआईआर दर्ज हुई और न ही किसी अधिकारी ने मौके पर जाकर झांकना जरूरी समझा। सवाल उठता है,
क्या खबर छपना अब अपराध की श्रेणी में नहीं आता? या फिर खनन माफिया इतना ताकतवर हो चुका है कि प्रशासन उसके आगे नतमस्तक है?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि खनन माफिया खुलेआम यह कहता फिर रहा है कि “ऊपर तक सेटिंग है”, इसी घमंड में सड़कों को रौंदा जा रहा है, खेतों को बर्बाद किया जा रहा है और सरकारी राजस्व को लाखों का चूना लगाया जा रहा है। अगर यही हाल रहा तो आने वाले समय में कोई बड़ा हादसा होना तय है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासनिक उदासीनता पर होगी।
जनता पूछ रही है कि क्या अधिकारी किसी आदेश का इंतजार कर रहे हैं?या फिर अवैध खनन पर कार्रवाई सिर्फ कागजों और बैठकों तक सीमित रह गई है?
अब हालात ऐसे बन चुके हैं कि यदि जल्द ही सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो यह साफ मान लिया जाएगा कि अवैध मिट्टी खनन को प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त है। जनता अब चेतावनी के मूड में है और जवाब चाहती है—सिर्फ आश्वासन नहीं, सीधी कार्रवाई। कानून की चुप्पी कब टूटेगी, या फिर मिट्टी के साथ-साथ न्याय भी ट्रॉलियों में भरकर बाहर जाता रहेगा—यह सवाल आज हर गली, हर गांव में गूंज रहा है। रात्रि होते खनन प्रारंभ होता हैं और दिन में दस बजे तक चलता हैं।

