Varanasi UP….हर दिन 18 बच्चे हो रहे लापता, यूपी में बढ़ी चिंता।

हर दिन 18 बच्चे हो रहे लापता, यूपी में बढ़ी चिंता।

2024 में 6,484 बच्चे हुए गुम; दो-तिहाई लड़कियां, एनसीआरबी रिपोर्ट में खुलासा।

लखनऊ, उत्तर प्रदेश में बच्चों के लापता होने के मामले लगातार चिंता बढ़ा रहे हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024 में राज्य में कुल 6,484 बच्चों के लापता होने के मामले दर्ज किए गए। यह संख्या वर्ष 2023 के 6,167 मामलों की तुलना में लगभग 5 प्रतिशत अधिक है। इसका मतलब है कि प्रदेश में हर दिन औसतन 18 बच्चे लापता हुए।

चाइल्ड राइट्स एंड यू (क्राई) द्वारा एनसीआरबी आंकड़ों के विश्लेषण में सामने आया कि उत्तर प्रदेश लापता बच्चों के मामलों में देश के शीर्ष दस राज्यों में बना हुआ है। राष्ट्रीय स्तर पर भी स्थिति चिंताजनक है। वर्ष 2024 में देशभर में कुल 1,47,175 बच्चे लापता हुए, जिनमें 1,11,271 लड़कियां शामिल थीं। यह संख्या 2023 की तुलना में 6.2 प्रतिशत अधिक है।

हर दिन 11 लड़कियां हो रहीं लापता

उत्तर प्रदेश में लापता बच्चों में लड़कियों की संख्या सबसे अधिक है। आंकड़ों के मुताबिक 2024 में कुल 4,143 लड़कियां लापता हुईं। यानी प्रदेश में प्रतिदिन औसतन 11 लड़कियां गायब हो रही हैं। वर्ष 2023 में भी लापता बच्चों में 65.3 प्रतिशत लड़कियां थीं, जो उनकी बढ़ती असुरक्षा को दर्शाता है।

रिकवरी में सुधार, लेकिन चुनौती बरकरार

रिपोर्ट के अनुसार 2024 में 4,868 बच्चों को खोज लिया गया, जो कुल मामलों का लगभग 75 प्रतिशत है। वर्ष 2023 में यह रिकवरी दर 66.6 प्रतिशत थी। वहीं, अनट्रेस्ड बच्चों की संख्या 2023 के 2,057 से घटकर 2024 में 1,616 रह गई है। इसे प्रशासनिक प्रयासों और बेहतर फॉलो-अप का परिणाम माना जा रहा है।

क्राई की क्षेत्रीय निदेशक सोहा मोइत्रा ने कहा कि उत्तर प्रदेश में बच्चों की ट्रेसिंग व्यवस्था में सुधार हुआ है, लेकिन अब भी बड़ी संख्या में बच्चे लापता हैं। उन्होंने कहा कि रोकथाम के उपायों को मजबूत करने, एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाने और समय पर फॉलो-अप सुनिश्चित करने की जरूरत है।

हर साल बढ़ रहे नए मामले

आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024 में 4,427 नए मामले दर्ज हुए। इससे स्पष्ट है कि हर साल सामने आने वाले नए मामले इस समस्या को और गंभीर बना रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि समुदाय स्तर पर जागरूकता और सुरक्षा तंत्र को मजबूत करना जरूरी है।

‘बालप्रहरी’ पहल से जागरूकता

सोहा मोइत्रा ने बताया कि क्राई गांव और पंचायत स्तर पर ‘बालप्रहरी’ जैसी पहलों के माध्यम से बच्चों की सुरक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ा रहा है। इसके तहत बाल तस्करी, बाल श्रम, बाल विवाह और लापता बच्चों के मामलों पर समुदायों को सतर्क किया जा रहा है।

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