Varanasi UP…माहवारी पर खुलकर बोलीं किशोरियां, बोलीं— “झिझक छोड़ो, खुलकर बात करो”

माहवारी पर खुलकर बोलीं किशोरियां, बोलीं— “झिझक छोड़ो, खुलकर बात करो”

जन औषधि केंद्रों पर ‘नो पैड’ और स्कूलों में निस्तारण की कमी से परेशान हैं किशोरियां

विश्व माहवारी स्वच्छता दिवस पर वाराणसी की 30 बस्तियों में निकली जागरूकता पदयात्रा।

वाराणसी, विश्व माहवारी स्वच्छता दिवस की पूर्व संध्या पर डॉ. शम्भुनाथ सिंह रिसर्च फाउंडेशन द्वारा “चलो वहां जरूरत है जहां” अभियान के तहत वाराणसी की 30 शहरी बस्तियों में जागरूकता पदयात्रा निकाली गई। इस अभियान में 1000 से अधिक किशोरियों ने हिस्सा लेकर माहवारी से जुड़े मिथकों को तोड़ने और खुलकर संवाद करने का संदेश दिया। कार्यक्रम में 9 बस्तियों में बाल अधिकार संस्था क्राई एवं अन्य सहयोगी संस्थाओं का भी सहयोग रहा।

कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए संस्था की कार्यक्रम निर्देशिका ने कहा कि माहवारी स्वच्छता आज भी समाज में उपेक्षित विषय बना हुआ है। उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाएं सराहनीय हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर अव्यवस्थाओं और बिचौलियों के कारण जरूरतमंद किशोरियों तक उनका पूरा लाभ नहीं पहुंच पा रहा है। उन्होंने कहा कि संस्था का उद्देश्य केवल जागरूकता फैलाना नहीं, बल्कि हर किशोरी तक सरकारी सुविधाएं पहुंचाना है, ताकि संसाधनों की कमी के कारण कोई भी लड़की शिक्षा और स्वास्थ्य से वंचित न रहे।

संस्था की परियोजना प्रबंधक राजश्री ने बताया कि 500 किशोरियों के बीच किए गए सर्वे में कई गंभीर तथ्य सामने आए। सर्वे में शामिल 95 प्रतिशत लड़कियों ने बताया कि जन औषधि केंद्रों से उन्हें सैनिटरी पैड नहीं मिल पाते और अक्सर खाली हाथ लौटना पड़ता है। वहीं 50 प्रतिशत किशोरियों ने कहा कि स्कूलों में इस्तेमाल किए गए पैड के सुरक्षित निस्तारण की व्यवस्था नहीं होने के कारण वे माहवारी के दिनों में स्कूल जाने से कतराती हैं।

हालांकि, अभियान के दौरान सकारात्मक बदलाव भी देखने को मिला। किशोरियों ने पहले की तुलना में माहवारी पर खुलकर बात की और झिझक में कमी दिखाई।

अभियान सहयोगी दीक्षा सिंह ने बताया कि संस्था वाराणसी की 39 बस्तियों में किशोर-किशोरी समूहों के साथ लगातार कार्य कर रही है। अभियान के दौरान ‘बालपहरुआ किशोरी समूह’ की लड़कियों ने अपने परिजनों के साथ हाथों में तख्तियां लेकर रैली निकाली और लोगों को माहवारी से जुड़े अंधविश्वासों और मिथकों को छोड़ने का संदेश दिया।

पदयात्रा के बाद आयोजित संवाद शिविर में किशोरियों ने माहवारी से जुड़े सवाल बेझिझक पूछे। संस्था के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं ने वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर उनकी जिज्ञासाओं का समाधान किया और बताया कि पीरियड्स कोई शर्म या बीमारी नहीं, बल्कि एक सामान्य जैविक प्रक्रिया है।

यह अभियान अमरपुर, दानियालपुर, पुरानापुल, रसूलगढ़, सरायमोहना समेत कई बस्तियों में आयोजित किया गया।

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