हिंदी पत्रकारिता दिवस पर आत्ममंथन की जरूरत: कुछ कथित पत्रकारों की हरकतों से धूमिल हो रही पेशे की साख।
कवरेज के नाम पर मनमानी, अभद्र व्यवहार और चोरी जैसी घटनाओं से बढ़ी चिंता; असली पत्रकारों की विश्वसनीयता पर भी पड़ रहा असर।
वाराणसी। हिंदी पत्रकारिता दिवस के अवसर पर जहां पत्रकारिता के मूल्यों, दायित्वों और समाज के प्रति उसकी भूमिका को याद किया जा रहा है, वहीं कुछ कथित पत्रकारों और स्वयंभू यूट्यूबरों की गतिविधियां इस सम्मानित पेशे की छवि को नुकसान पहुंचाने का काम कर रही हैं। शहर में लगातार सामने आ रही घटनाओं ने पत्रकारिता की साख और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आरोप है कि कवरेज के नाम पर विभिन्न आयोजनों में पहुंचने वाले कुछ लोग पत्रकारिता की मर्यादाओं को ताक पर रखकर व्यक्तिगत लाभ लेने में जुटे हैं। आयोजकों का कहना है कि ऐसे लोग बिना आमंत्रण कार्यक्रमों में पहुंच जाते हैं, अनुशासनहीन व्यवहार करते हैं और कई बार कवरेज के बाद आर्थिक लाभ की अपेक्षा भी रखते हैं। कुछ आयोजकों ने यह भी आरोप लगाया कि कार्यक्रम स्थलों से नाश्ते के पैकेट और अन्य सामग्री ले जाने जैसी घटनाएं भी सामने आई हैं।
हाल ही में शहर के एक प्रतिष्ठित क्लब में आयोजित कार्यक्रम के दौरान एक व्यक्ति का मोबाइल फोन गायब हो गया था। प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद मोबाइल बरामद हुआ। आयोजन से जुड़े लोगों का कहना है कि उस कार्यक्रम में कुछ ऐसे लोग भी मौजूद थे जिनका आयोजन से कोई औपचारिक संबंध नहीं था। हालांकि मामले में किसी के खिलाफ आधिकारिक आरोप सिद्ध नहीं हुआ, लेकिन घटना ने कई सवाल जरूर खड़े किए।
इसी प्रकार अर्दली बाजार क्षेत्र की एक कॉलोनी में कुछ दिन पूर्व एक महिला पत्रकार और एक समाचार एजेंसी संचालक के बीच विवाद का मामला चर्चा में रहा। महिला पत्रकार द्वारा छेड़खानी का आरोप लगाए जाने के बाद पुलिस को बुलाया गया। बाद में लिखित माफीनामा दिए जाने के उपरांत मामला शांत हुआ।
एक अन्य घटना प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान सामने आई, जहां एक महिला पत्रकार की वाहन की चाबी गायब हो गई थी। महिला पत्रकार द्वारा कई बार पूछने के बावजूद संबंधित व्यक्ति चाबी लेने से इनकार करता रहा। बाद में सीसीटीवी फुटेज की जांच में एक पत्रकार चाबी उठाते हुए दिखाई दिया। कोतवाली पुलिस के हस्तक्षेप के बाद और माफी मांगने पर मामला समाप्त हुआ।
पत्रकारिता से जुड़े वरिष्ठ लोगों का कहना है कि ऐसी घटनाएं पूरे पत्रकार समाज को कटघरे में खड़ा कर देती हैं। कुछ लोगों की अनुचित हरकतों के कारण ईमानदारी और निष्ठा से कार्य करने वाले पत्रकारों की छवि भी प्रभावित होती है। समाज में पत्रकारों के प्रति अविश्वास का वातावरण बनना लोकतंत्र के लिए भी चिंता का विषय है।
विशेषज्ञों के अनुसार पत्रकार का मूल दायित्व निष्पक्षता, सत्यता और जनहित के आधार पर समाचारों का संकलन एवं प्रसारण करना है। पत्रकार समाज और प्रशासन के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु की भूमिका निभाता है तथा लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाने में योगदान देता है। पत्रकारिता केवल सूचना देने का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व और नैतिक मूल्यों से जुड़ा एक महत्वपूर्ण दायित्व है।
शहर के बुद्धिजीवियों, सामाजिक संगठनों और आयोजकों ने प्रशासन से मांग की है कि पत्रकारिता की आड़ में अनुचित गतिविधियों में संलिप्त लोगों की पहचान कर आवश्यक कार्रवाई की जाए। साथ ही पत्रकार संगठनों से भी अपेक्षा की गई है कि वे पेशे की गरिमा बनाए रखने के लिए आचार संहिता और आत्मानुशासन को मजबूत करें।
हिंदी पत्रकारिता दिवस पर यह अवसर केवल शुभकामनाएं देने का ही नहीं, बल्कि आत्ममंथन का भी है।
पत्रकारिता लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है और इसकी गरिमा बनाए रखना पत्रकार समाज के साथ-साथ पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
हिंदी पत्रकारिता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।
