जिला रिपोर्टर रोहित मिश्रा रायबरेली
धारा लक्ष्य समाचार पत्र
रायबरेली। लखनऊ में कोचिंग संस्थान से जुड़े दर्दनाक हादसे के बाद प्रदेश सरकार के सख्त निर्देशों के क्रम में रायबरेली प्रशासन भी एक्शन मोड में नजर आ रहा है। जिले में संचालित कोचिंग संस्थानों के मानकों और सुरक्षा व्यवस्थाओं की जांच शुरू होने के बाद कई कोचिंग संचालकों में बेचैनी देखी जा रही है। प्रशासन की सख्ती के चलते कई संस्थानों ने अपने बैनर और पोस्टर तक हटा लिए हैं, जबकि कुछ स्थानों पर कोचिंग गतिविधियां भी प्रभावित हुई हैं।
जानकारी के अनुसार रायबरेली शहर और आसपास के क्षेत्रों में लगभग ढाई सौ कोचिंग संस्थान संचालित हैं, लेकिन इनमें से केवल सीमित संख्या में संस्थानों का विधिवत पंजीकरण होने की बात सामने आ रही है। प्रशासन द्वारा निर्धारित सुरक्षा और अन्य आवश्यक मानकों को पूरा करने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
इसी बीच रायबरेली कोचिंग एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर मानकों को पूरा करने के लिए अतिरिक्त समय दिए जाने की मांग की है। उनका कहना है कि कई नए नियमों और व्यवस्थाओं को लागू करने में समय लगेगा, इसलिए कोचिंग संस्थानों को राहत दी जानी चाहिए।वहीं कोचिंग एसोसिएशन के एक संरक्षक द्वारा दिए गए बयान को लेकर भी चर्चा का माहौल है।
उन्होंने कहा कि सरकारी और निजी विद्यालयों में अपेक्षित स्तर की शिक्षा नहीं मिलने के कारण बड़ी संख्या में छात्र कोचिंग संस्थानों का रुख करते हैं। उनके इस बयान पर शिक्षा जगत और अभिभावकों के बीच अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।सूत्रों के अनुसार जिले में वर्षों से कई कोचिंग संस्थान बिना पूर्ण मानकों के संचालित हो रहे थे।
छात्रों से मनमाने ढंग से फीस वसूले जाने तथा सुरक्षा मानकों की अनदेखी किए जाने की शिकायतें भी समय-समय पर सामने आती रही हैं। अब मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद प्रशासन इन मामलों को गंभीरता से लेते हुए जांच और सत्यापन की प्रक्रिया में जुट गया है।
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि छात्रों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और निर्धारित मानकों का पालन न करने वाले संस्थानों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल कोचिंग संचालक प्रशासन से राहत और समय की मांग कर रहे हैं, जबकि प्रशासन सुरक्षा मानकों के अनुपालन पर जोर दे रहा है।
