जिला रिपोर्टर रोहित मिश्रा रायबरेली
धारा लक्ष्य समाचार पत्र
रायबरेली। जिला अस्पताल में इलाज कराने पहुंचने वाले मरीजों को सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ दिलाने के लिए शासन स्तर से दवाओं और उपचार की व्यवस्था की गई है। इसके बावजूद अस्पताल के कुछ चिकित्सकीय कर्मचारियों पर मरीजों को कथित तौर पर बाहर से दवाएं खरीदने के लिए भेजे जाने के आरोप सामने आए हैं।
मामले में संबंधित अधिकारियों से निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।शिकायत में जिला अस्पताल के चिकित्सक डॉ. अतुल पाण्डेय एवं फार्मासिस्ट आनंददेव का नाम लेते हुए आरोप लगाया गया है कि मरीजों को अस्पताल में उपलब्ध अथवा शासन द्वारा निर्धारित दवाओं के बजाय बाहर के मेडिकल स्टोर से दवाएं खरीदने के लिए कहा जा रहा है।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि सरकारी अस्पताल में उपलब्ध दवाओं के बावजूद मरीजों को निजी मेडिकल स्टोर से दवाएं खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है, तो इससे आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों और उनके परिजनों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है।
ऐसे में पूरे मामले की जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाना जरूरी है।मामले की निष्पक्ष जांच के लिए मरीजों की पर्चियों, चिकित्सकों द्वारा लिखी गई दवाओं, अस्पताल के दवा स्टॉक रजिस्टर और संबंधित मेडिकल स्टोर से हुई दवा खरीद के अभिलेखों की जांच किए जाने की मांग की गई है।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि जांच के दौरान यदि किसी प्रकार की अनियमितता या नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
शिकायतकर्ताओं ने कहा कि सरकारी अस्पताल गरीब और जरूरतमंद मरीजों के लिए उपचार का महत्वपूर्ण सहारा है। इसलिए यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि मरीजों को सरकारी व्यवस्था के तहत उपलब्ध सुविधाओं और दवाओं का समुचित लाभ मिले और उन्हें अनावश्यक रूप से महंगी दवाएं बाहर से खरीदने के लिए मजबूर न होना पड़े।
अब निगाहें स्वास्थ्य विभाग की जांच और कार्रवाई पर टिकी हैं। जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।
