स्वच्छ भारत मिशन की खुली पोल: लाखों का सामुदायिक शौचालय बना गौशाला, बदहाली पर जिम्मेदार बेपरवाह

रिपोर्टर रोहित मिश्रा रायबरेली

धारा लक्ष्य समाचार पत्र

रायबरेली/हरचंदपुर। सरकार की ओर से स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन जिम्मेदारों की कथित लापरवाही के चलते योजनाओं की जमीनी हकीकत कुछ और ही नजर आ रही है। हरचंदपुर विकासखंड के ग्राम अघोरा में वर्ष 2020-21 में 15वें वित्त आयोग के फंड से बनाया गया सामुदायिक शौचालय आज बदहाली की तस्वीर बनकर रह गया है।मौके की तस्वीरें व्यवस्था की पोल खोलने के लिए काफी हैं।

सामुदायिक शौचालय के अंदर और बाहर गंदगी का अंबार लगा है, जबकि परिसर में जानवर बंधे नजर आ रहे हैं। आसपास की सड़कें भी बदहाल हैं। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि जिस उद्देश्य से लाखों रुपये खर्च कर सामुदायिक शौचालय का निर्माण कराया गया था, वह आखिर ग्रामीणों के किस काम आ रहा है?

ग्राम प्रधान उमेश सैनी का कहना है कि ग्रामीण जबरन शौचालय परिसर में जानवर बांध देते हैं। उन्होंने कई बार ग्रामीणों को मना करने के साथ शिकायत भी की, लेकिन लोग मानने को तैयार नहीं हैं। प्रधान ने शौचालय की दुर्दशा के लिए रखरखाव के अभाव और ग्रामीणों की लापरवाही को जिम्मेदार बताया है।

वहीं ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम प्रधान ने शौचालय के निर्माण और रखरखाव के साथ-साथ गांव की सड़कों पर होने वाले खर्च पर भी समुचित ध्यान नहीं दिया। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते शौचालय की देखरेख और साफ-सफाई कराई जाती तो आज इसकी ऐसी हालत नहीं होती।

ग्रामीणों के मुताबिक गांव की कई महिलाएं आज भी शौचालय की बदहाल व्यवस्था के कारण खुले में शौच जाने को मजबूर हैं। प्रधान और ग्रामीणों के एक-दूसरे पर लगाए जा रहे आरोपों के बीच असल जिम्मेदार कौन है, यह जांच का विषय है।सबसे बड़ा सवाल यह है कि स्वच्छ भारत मिशन के तहत लाखों रुपये खर्च कर बनाया गया।

सामुदायिक शौचालय जब इस्तेमाल के लायक ही नहीं है, तो सरकारी धन खर्च करने का मकसद आखिर कितना पूरा हुआ? अब देखना होगा कि जिम्मेदार विभाग इस बदहाली पर कब संज्ञान लेता है और शौचालय की व्यवस्था कब सुधरती है।

Related posts