अस्पताल मार्ग पर गरजा प्रशासन का बुलडोजर, अतिक्रमणकारियों में मचा हड़कंप

जेसीबी से तिरपाल, गुमटियां और ठेले हटाए, दोबारा कब्जा करने पर कार्रवाई की चेतावनी

अतिक्रमण हटाना जरूरी, मगर गरीबों की रोजी-रोटी का भी हो इंतजाम : नागरिक

धारा लक्ष्य समाचार 

जिला संवाददाता शफीक अहमद

सीतापुर। जिला अस्पताल और जिला महिला अस्पताल जाने वाले प्रमुख मार्ग पर मंगलवार को प्रशासन का बुलडोजर गरजा तो सड़क की पटरियों पर वर्षों से जमे अतिक्रमणकारियों में हड़कंप मच गया। प्रभारी अधिशासी अधिकारी/एसडीएम न्यायिक सीमा सिंह के निर्देश पर नगर पालिका और पुलिस की संयुक्त टीम ने दो जेसीबी मशीनों के साथ अभियान चलाकर सड़क किनारे लगे तिरपाल, गुमटियां, ठेले-खोमचे और अन्य अस्थायी कब्जे ध्वस्त कर दिए।

अचानक हुई कार्रवाई से कई दुकानदारों में अफरा-तफरी का माहौल रहा। प्रशासन ने साफ कर दिया कि सार्वजनिक मार्ग पर दोबारा कब्जा करने वालों के खिलाफ अब सख्त कार्रवाई की जाएगी।

अस्पताल मार्ग पर अतिक्रमण लंबे समय से यातायात के लिए परेशानी का सबब बना हुआ था। सड़क की पटरियों और फुटपाथ पर कब्जे के चलते मार्ग संकरा हो गया था, जिससे आए दिन जाम की स्थिति पैदा होती थी। सबसे गंभीर स्थिति उस समय बनती थी जब जाम में एंबुलेंस फंस जाती थी। मरीजों और तीमारदारों को भी अस्पताल पहुंचने में परेशानी उठानी पड़ती थी।

अभियान के दौरान उप जिलाधिकारी सदर डॉ. जनार्दन कुमार, ट्रैफिक इंस्पेक्टर फरीद कुमार, कोतवाली पुलिस तथा नगर पालिका की टीम मौजूद रही। पुलिस ने यातायात संभालते हुए एंबुलेंस और अस्पताल आने-जाने वाले वाहनों को रास्ता दिलाया।

प्रशासन की कार्रवाई से जहां अस्पताल मार्ग के लोगों ने राहत की सांस ली, वहीं गरीब और छोटे दुकानदारों की रोजी-रोटी को लेकर सवाल भी खड़े हो गए हैं। शहर के बुद्धिजीवियों और सम्मानित नागरिकों का कहना है कि सार्वजनिक रास्तों को अतिक्रमणमुक्त करना जरूरी है, लेकिन फुटपाथ अथवा सड़क किनारे छोटी दुकान लगाकर परिवार पालने वालों के सामने भीषण संकट खड़ा हो जाता है।

ऐसे लोगों के लिए वैकल्पिक स्थान अथवा व्यवस्थित वेंडिंग जोन की व्यवस्था किए बिना लगातार कार्रवाई करने से उनकी आजीविका प्रभावित हो सकती है। नागरिकों का सवाल है कि शहर को अतिक्रमणमुक्त करने के साथ क्या गरीबों के लिए रोजगार और व्यवस्थित स्थान की कोई ठोस योजना भी बनेगी?

नागरिकों ने प्रशासन से पूछा—सिर्फ बुलडोजर से बदलेगा शहर या बुनियादी सुविधाओं पर भी चलेगा विकास का पहिया? लोगों का कहना है कि अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई अपनी जगह जरूरी है, लेकिन शहर के कई इलाकों में सड़क, जलनिकासी, जलभराव, बिजली और पानी जैसी मूलभूत समस्याएं आज भी मुंह बाए खड़ी हैं। बरसात में जलभराव, खराब सड़कों और जलनिकासी की समस्या से नागरिकों को परेशानी उठानी पड़ती है।

ऐसे में प्रशासन को अतिक्रमण हटाने के साथ शहर की इन समस्याओं के स्थायी समाधान की दिशा में भी प्रभावी कदम उठाने चाहिए।

अब निगाह कार्रवाई के अगले चरण पर है। प्रशासन ने दोबारा अतिक्रमण न करने की चेतावनी देते हुए स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक मार्ग और फुटपाथ पर फिर कब्जा मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई और जुर्माना लगाया जाएगा। नागरिकों का कहना है कि अभियान तभी पूरी तरह सफल माना जाएगा।

जब अस्पताल मार्ग स्थायी रूप से अतिक्रमणमुक्त रहे, एंबुलेंस को निर्बाध रास्ता मिले और छोटे दुकानदारों के लिए भी सम्मानजनक वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। व्यवस्था भी बचे, सड़क भी खुले और गरीब की रोजी भी—शहर को अब इसी संतुलित विकास की जरूरत है।

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