रिपोर्टर रोहित मिश्रा रायबरेली
धारा लक्ष्य समाचार पत्र
रायबरेली। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के प्रस्तावित रायबरेली दौरे से पहले जिले की राजनीति अचानक गरमा गई है। शहर के प्रमुख चौराहों, सार्वजनिक स्थलों और व्यस्त मार्गों पर लगाए गए “अखिलेश यादव वापस जाओ” लिखे पोस्टरों ने राजनीतिक माहौल में नई हलचल पैदा कर दी है। पोस्टर सामने आने के बाद भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है।इन विवादित पोस्टरों को लेकर स्थानीय भाजपा नेता हरिओम चतुर्वेदी ने खुलकर जिम्मेदारी ली है।
उनका कहना है कि यह पोस्टर क्षेत्र की जनता और कार्यकर्ताओं की भावनाओं का प्रतीक हैं तथा रायबरेली की जनता को सपा की नीतियां स्वीकार नहीं हैं। भाजपा खेमे ने इसे जनभावनाओं की अभिव्यक्ति बताते हुए अपने कदम को सही ठहराया है।वहीं दूसरी ओर समाजवादी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने पोस्टरबाजी पर कड़ी आपत्ति जताई है।
सपा नेताओं का आरोप है कि विपक्ष की बढ़ती सक्रियता और अखिलेश यादव की लोकप्रियता से घबराकर भाजपा इस तरह की राजनीति कर रही है। पार्टी कार्यकर्ताओं ने इसे लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ बताते हुए प्रशासन से मामले का संज्ञान लेने की मांग की है।पोस्टर वार के बाद जिले में राजनीतिक चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।
चौराहों से लेकर गांव-कस्बों तक इस मुद्दे को लेकर बहस छिड़ी हुई है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आगामी चुनावी तैयारियों के बीच इस तरह की घटनाएं जिले के सियासी माहौल को और अधिक गर्मा सकती हैं।अखिलेश यादव के दौरे से पहले शुरू हुई इस पोस्टरबाजी ने साफ कर दिया है कि रायबरेली की राजनीति आने वाले दिनों में और अधिक आक्रामक होने वाली है।
अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि इस राजनीतिक टकराव का अगला अध्याय किस रूप में सामने आता है।
