श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिवस भक्त प्रहलाद व अजामिल की कथा सुनकर श्रोता हुए भाव विभोर

धारा लक्ष्य समाचार पत्र

रिपोर्टर रोहित मिश्रा रायबरेली

सतांव रायबरेली। मलिकमऊ चौबारा गांव में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में बुधवार को कथा वाचक आचार्य कृष्ण गोपाल ठाकुर महराज ने भक्त प्रह्लाद और अजामिल की कथा सुनाई। आचार्य ने कहा कि हिरणाकश्यपअत्याचारी राक्षस राजा था। वह चाहता था कि सभी उसकी पूजा करें,लेकिनउसका पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु का परम भक्त था। हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद को विष्णु भक्ति से रोकने के लिए कई अत्याचार किए,

उसे पहाड़ से फिंकवाया, हाथी से कुचलवाया और आग में जलाने की कोशिश की, पर हर बार भगवान ने उसकी रक्षा की।आचार्य ने कहा कि अंत में हिरण्यकश्यप ने पूछा कि तेरा भगवान कहाँ है? प्रह्लाद ने कहा वह तो कण-कण में है।तबहिरण्यकश्यप ने खंभे पर प्रहार किया और खंभे से भगवान नृसिंह अवतार प्रकट हुए।

उन्होंने हिरण्यकश्यप का वध कर भक्त प्रह्लाद की रक्षा की। उन्होंने कहा कि सच्ची भक्ति में बहुत शक्ति होती है और अहंकार का अंत निश्चित है। आचार्य ने अजामिल की कथा सुनाई।इस अवसर पर संजय सिंह, संगीता सिंह, अजय सिंह, धनंजय सिंह, राजपति सिंह, राम प्रकाश पांडेय, उदय भान सिंह, चंद्र प्रकाश सिंह, सूर्य पाल, अनंत बहादुर सिंह, राम द्विवेदी, करुणा शंकर त्रिवेदी,

राम मोहन त्रिवेदी, राम बाबू गुप्ता, माता बक्स सिंह, बबलू सिंह, विमल देव सिंह, राम जी तिवारी, अवधेश सिंह, प्रज्ञा सिंह, प्रतीक्षा सिंह, संतोष कुमारी, राम प्रताप नाई आदि मौजूद रहे।

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