जब माँ जागेगी, तभी समाज जागेगा – पिलखनी में महर्षि कश्यप ज्ञान आश्रम का महिला जागरूकता अभियान
दीपावली पर ‘सुरक्षित पटाखा – सुरक्षित बचपन’ का दिया विशेष संदेश, महिलाओं ने लिया समाज सुधार का संकल्प
धारा लक्ष्य समाचार
सहारनपुर।
कहते हैं कि अगर एक पुरुष को शिक्षित करो तो एक व्यक्ति शिक्षित होता है, लेकिन अगर एक महिला को शिक्षित करो तो पूरा परिवार शिक्षित हो जाता है। इसी महान विचार को धरातल पर उतारने का काम कर रहा है महर्षि कश्यप ज्ञान आश्रम, पिलखनी।
आश्रम द्वारा पिछले कई महीनों से लगातार महिला जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान का उद्देश्य केवल भाषण देना नहीं, बल्कि गांव की हर महिला को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना, उसे अपने अधिकारों के प्रति जागरूक करना और उसे परिवार व समाज में निर्णय लेने की ताकत देना है।
इसी अभियान के तहत दीपावली पर्व से पहले आश्रम द्वारा पिलखनी और आसपास के गांवों में विशेष जागरूकता बैठकों का आयोजन किया गया। इस बार का मुख्य विषय था – दीपावली पर बच्चों द्वारा सुरक्षित पटाखा चलाए जाने पर विशेष ध्यान
क्यों जरूरी था यह अभियान
हर साल दीपावली के बाद अखबारों में ऐसी खबरें आती हैं – कहीं बच्चे का हाथ जल गया, कहीं आंख में चिंगारी चली गई, कहीं घर में आग लग गई।
संस्थापक प्रधान मांगेराम कश्यप ने बैठक में कहा –
“हम दीपावली मनाने से मना नहीं कर रहे। दीपावली हमारे संस्कारों का पर्व है, खुशियों का पर्व है। लेकिन खुशी तब ही है जब हमारा बच्चा सुरक्षित रहे। पटाखा बच्चों के हाथ में खिलौना नहीं, आग है। और आग से खेलना सिखाया नहीं जाता, उससे बचकर रहना सिखाया जाता है।”
उन्होंने कहा कि अक्सर माँ-बाप 500-1000 रुपये के पटाखे तो लाकर दे देते हैं, लेकिन 5 मिनट बैठकर बच्चे को यह नहीं बताते कि पटाखा कैसे चलाना है। यही लापरवाही हादसे का कारण बनती है।
बैठक में महिलाओं को विस्तार से समझाए गए 15 सुरक्षा नियम
आश्रम की टीम ने महिलाओं को एक-एक करके पटाखों से जुड़े नियमों को सरल भाषा में समझाया –
1. निगरानी सबसे पहले 5 से 14 साल तक के बच्चों को कभी अकेले पटाखे न चलाने दें। कोई बड़ा व्यक्ति हमेशा साथ खड़ा रहे।
2. जगह का चयन:
पटाखे हमेशा खुले मैदान, खाली प्लॉट या सड़क के बीच में चलाएं। घर के अंदर, बरामदे, छत की मुंडेर, गैलरी या जहां गाड़ियां खड़ी हों, वहां कभी पटाखे न चलाएं।
3. कपड़ों का विशेष ध्यान:बच्चों को पटाखे चलाते समय सूती और शरीर से सटे हुए कपड़े पहनाएं। नायलॉन, टेरीकॉट, सिंथेटिक कपड़े और चुन्नी-दुपट्टा आग को तुरंत पकड़ लेते हैं। लड़कियों के लंबे बालों को बांधकर रखें।
4. हाथ में पकड़कर पटाखा नहीं:
रॉकेट, सुतली बम, अनार, चकरी को हाथ में पकड़कर कभी न जलाएं। रॉकेट को बोतल में नहीं, खाली मैदान में सीधा रखकर जलाएं।
5. एक बार में एक पटाखा:
एक साथ कई पटाखे जलाने की होड़ न लगाएं। एक पटाखा जलाएं, दूर हटें, फिर दूसरा जलाएं।
6. न जले पटाखे से दूर रहें:
अगर कोई पटाखा न जले तो तुरंत उसे उठाकर न देखें। कम से कम 5 मिनट इंतजार करें, फिर उस पर पानी डालकर नष्ट कर दें।
7. पानी और रेत तैयार रखें:
जहां पटाखे चला रहे हैं, वहां एक बाल्टी पानी, एक बोरी रेत और एक मोटा कंबल जरूर रखें। आग लगने पर तुरंत काम आएगा।
8. कान और आंख की सुरक्षा:
तेज आवाज वाले बम से बच्चों के कान के पर्दे फट सकते हैं। छोटे बच्चों के कान में रुई लगा दें। आंख में चिंगारी जाने से बचाने के लिए पटाखे से दूर खड़े रहें।
9. जलने पर क्या करें:
अगर हाथ जल जाए तो तुरंत 10 मिनट तक ठंडे बहते पानी में रखें। उस पर टूथपेस्ट, हल्दी, तेल, बर्फ बिल्कुल न लगाएं। ज्यादा जलने पर तुरंत अस्पताल ले जाएं।
10. फर्स्ट एड बॉक्स:
दीपावली पर घर में बर्नोल, रुई, पट्टी, ठंडा पानी और डॉक्टर का नंबर पहले से तैयार रखें।
11. दीये से सुरक्षा:
पूजा के समय दीये को पर्दे, कागज, लकड़ी और कपड़ों से कम से कम 3 फीट दूर रखें। सोते समय सभी दीये बुझा दें।
12. बुजुर्गों और बीमारों का ध्यान:
घर में अगर अस्थमा, हृदय रोगी या बुजुर्ग हैं तो उनके कमरे के दरवाजे बंद रखें और तेज आवाज वाले पटाखे घर के पास न चलाएं।
13. पशु-पक्षियों का भी ख्याल:
कुत्ते, गाय, पक्षी पटाखों की आवाज से बहुत डरते हैं। उनके पास बम न फोड़ें। यह भी एक तरह की हिंसा है।
14. पर्यावरण की रक्षा:
ज्यादा पटाखों से धुआं बढ़ता है, जिससे बच्चों को ही सांस की बीमारी होती है। कम पटाखे जलाएं, ज्यादा दीये जलाएं।
15. पैसों की बचत:
पटाखों पर हजारों रुपये फूंकने से अच्छा है कि उस पैसे से बच्चे को किताब, कपड़ा या उसकी पसंद की कोई चीज दिलाएं।
सिर्फ पटाखे नहीं, पूरा समाज सुधार है लक्ष्य
बैठक में केवल दीपावली पर ही बात नहीं हुई। महिला जागरूकता अभियान के तहत महिलाओं को कई अन्य विषयों पर भी जागरूक किया गया –
1. बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ – बेटी को बोझ नहीं, वरदान समझें। बेटी पढ़ेगी तो दो परिवारों का नाम रोशन करेगी।
2. मृत्युभोज, दहेज, नशा जैसी कुरीतियों से मुक्ति – आश्रम पहले से ही मृत्युभोज बंद कराने का अभियान चला रहा है। महिलाओं से कहा गया कि ये कुरीतियां घर की महिलाओं के सहयोग के बिना बंद नहीं हो सकतीं।
3. स्वास्थ्य और स्वच्छता -* घर में साफ पानी, साफ शौचालय और बच्चों के टीकाकरण का ध्यान रखना।
4. महिलाओं की भागीदारी – पंचायत, स्कूल, समाज के हर कार्यक्रम में महिलाओं की भागीदारी होनी चाहिए। महिलाएं केवल दर्शक नहीं, निर्णयकर्ता बनें।
महिलाओं की जुबानी – अब हम चुप नहीं बैठेंगी
बैठक में उपस्थित महिलाओं ने कहा कि पहले उन्हें लगता था कि समाज सुधार केवल पुरुषों का काम है, लेकिन अब आश्रम ने उन्हें समझाया है कि घर की असली मुखिया महिला ही है।
एक महिला ने कहा – पहले हम सोचते थे दीपावली पर पटाखे चलाना बच्चों की जिद है, लेकिन अब समझ आया कि सुरक्षा सिखाना हमारी जिम्मेदारी है। इस बार हम अपने बच्चों को खुद साथ लेकर पटाखे चलाएंगे।”_
दूसरी महिला ने कहा – आश्रम ने हमें बताया कि मृत्युभोज बंद करना हो या नशा बंद करना हो, शुरुआत घर से ही होगी। हम अपने घर से इसकी शुरुआत करेंगी।”
अंत में लिया गया संकल्प*
कार्यक्रम के अंत में सभी महिलाओं ने हाथ उठाकर 5 संकल्प लिए 1. इस दीपावली पर हम सुरक्षित दीपावली मनाएंगी।
2. बच्चों को बिना निगरानी के पटाखे नहीं चलाने देंगी।
3.घर में दीये ज्यादा और पटाखे कम जलाएंगी।
4. बेटी की शिक्षा में कोई कमी नहीं आने देंगी।
5. समाज की हर कुरीति के खिलाफ महर्षि कश्यप ज्ञान आश्रम के साथ खड़ी रहेंगी।
आश्रम के पदाधिकारियों ने कहा कि यह अभियान केवल दीपावली तक सीमित नहीं रहेगा। आने वाले दिनों में हर गांव में महिला चौपाल लगाई जाएगी, जहां महिलाओं की समस्याओं को सुना जाएगा और उनका समाधान किया जाएगा।
इस अवसर पर बबीता कश्यप, आशा रानी, उमा देवी, मंजू कश्यप, रोशनी कश्यप, मीनाक्षी कश्यप, सुनयना कश्यप, प्रवेश देवी, कविता रानी, पूनम देवी, राकेश देवी, रमा देवी, सुन्दरी, मछला देवी, किरण कश्यप सहित अनेक पदाधिकारी, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आशा कार्यकर्ता, स्कूल की अध्यापिकाएं और गांव की सैकड़ों महिलाएं उपस्थित रहीं।
