Balrampur: सामाजिक और शैक्षिक योगदान लिए मरहूम डॉ शादाब ज़फर को मिला ‘उतरौला रत्न’ सम्मान

सपा विधायक राकेश यादव ने उतरौला रत्न सम्मान से किया सम्मानित

धारा लक्ष्य समाचार विनय कुमार

बलरामपुर ब्यूरो चीफ नगर के एम.वाई. उस्मानी इंटर कॉलेज में शनिवार को साहित्य और समाज सेवा के क्षेत्र में अमिट छाप छोड़ने वाले मरहूम डॉ. शेहाब ज़फर को श्रद्धांजलि स्वरूप विशेष सम्मान अर्पित किया गया।

इस अवसर पर ‘बज़्मे अदब एजुकेशनल एंड कल्चरल सोसाइटी’ की ओर से सपा विधायक राकेश यादव ने स्वर्गीय डॉ. शेहाब ज़फर के छोटे भाई शादाब ज़फर को “उतरौला रत्न” स्मृति चिन्ह और प्रमाणपत्र प्रदान कर सम्मानित किया।

स्व. डॉ. शेहाब ज़फर, ‘अभिव्यक्ति’ — एक सामाजिक और साहित्यिक संस्था — के अध्यक्ष रहे, जिनकी सोच थी कि शिक्षा के क्षेत्र में बलरामपुर जैसे अतिपिछड़े जिले में जागरूकता और प्रगति की ऐसी लौ जलाई जाए, जिसका लाभ आने वाली नस्लों को भी मिलता रहे।

उनका सपना केवल शिक्षा तक सीमित नहीं था, बल्कि गरीबों और जरूरतमंदों को आत्मनिर्भर बनाना भी उनके मिशन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था।

मरहूम डॉ शेहाब ज़फर के नेतृत्व में ‘अभिव्यक्ति’ संस्था ने कई सराहनीय पहल कीं, जिनमें प्रमुख बुनियाद टैलेंट सर्च एग्जाम का आयोजन कर प्रतिभाओं को पहचान और अवसर प्रदान करना।

नेकी की दीवार के माध्यम से जरूरतमंदों तक वस्त्र और अन्य आवश्यक सामग्री पहुंचाना।

रमज़ान किट वितरण कर रोजेदारों की मदद करना।

आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों की फीस का वहन करना।

सिलाई मशीनें वितरित कर महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना।

साहित्यिक गतिविधियों जैसे मुशायरे और काव्य गोष्ठियों का आयोजन कर नगर में साहित्यिक चेतना को बढ़ावा देना।

कोविड महामारी के दौरान लोगों तक भोजन और जरूरी सामग्री पहुंचाना।

सम्मान समारोह के दौरान मंच पर जब मरहूम डॉ शेहाब ज़फर के छोटे भाई शादाब ज़फर को स्मृति चिन्ह और प्रमाणपत्र सौंपा गया, तो पूरा वातावरण भावनाओं से भर उठा। श्रोताओं ने करतल ध्वनि से डॉ ज़फर के अद्वितीय योगदान को याद करते हुए उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि दी।

विधायक राकेश यादव ने इस अवसर पर कहा कि मरहूम डॉ शेहाब ज़फर जैसे व्यक्तित्व समाज के लिए प्रेरणा हैं। उतरौला को उन पर गर्व है और आने वाली पीढ़ियों को उनके कार्यों से दिशा मिलती रहेगी।”

डॉ ज़फर का जीवन एक मिसाल है कि कैसे सीमित साधनों में भी सेवा, शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। ‘उतरौला रत्न’ सम्मान उनके प्रति नगर की श्रद्धांजलि और कृतज्ञता का प्रतीक बन गया है।

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