यादव महासभा के बैनरों से रायबरेली की सियासत में उबाल

सपा जिलाध्यक्ष पर गंभीर आरोप

2027 विधानसभा चुनाव से पहले सपा में अंदरूनी खींचतान के चर्चे तेज, शहर के कई इलाकों में लगे विवादित होर्डिंग बने चर्चा का विषय

रिपोर्टर रोहित मिश्रा रायबरेली

धारा लक्ष्य समाचार पत्र

रायबरेली। वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले रायबरेली की सियासत में समाजवादी पार्टी के अंदरूनी विवाद को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। शहर के कई प्रमुख इलाकों में यादव महासभा के नाम से लगाए गए विवादित बैनरों ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। इन होर्डिंग में सपा जिलाध्यक्ष वीरेंद्र यादव पर गंभीर आरोप लगाते हुए उन्हें समाज विरोधी बताया गया है। इतना ही नहीं, बैनर पर उन्हें समाज से निष्कासित किए जाने की बात भी लिखी गई है।

अचानक अलग-अलग स्थानों पर सामने आए इन बैनरों को लेकर तरह-तरह की राजनीतिक चर्चाएं शुरू हो गई हैं। खास बात यह है कि हाल ही में सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष आरपी यादव समेत 14 लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के बाद यह मामला सामने आया है। ऐसे में इन बैनरों को लेकर सियासी गलियारों में चर्चाओं का दौर और तेज हो गया है।

बैनर किसने लगाए और इसके पीछे वास्तविक वजह क्या है, इसे लेकर फिलहाल स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। हालांकि, शहर में लगे इन होर्डिंग ने सपा की अंदरूनी राजनीति को सार्वजनिक बहस के केंद्र में ला दिया है। विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी के भीतर उठती इस तरह की आवाजों को राजनीतिक जानकार आने वाले दिनों के लिए अहम संकेत के तौर पर देख रहे हैं।

वहीं, विवादित बैनरों को लेकर समाजवादी पार्टी की ओर से अभी कोई स्पष्ट आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अब देखना होगा कि पार्टी नेतृत्व इस पूरे मामले को किस तरह लेता है और बैनर लगाने वालों की पहचान सामने आने के बाद क्या कार्रवाई होती है।

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