सराय नदी बनी मुसीबत, घरों में घुसा बाढ़ का पानी; नदी और मकानों में एक हुआ जलस्तर

मूसलाधार बारिश से लोगों में बढ़ी बाढ़ की आशंका, 

नदी को नाला बताकर कराई गई प्लाटिंग पर उठे सवाल

धारा लक्ष्य समाचार 

जिला संवाददाता शफीक अहमद

सीतापुर। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश से शहर में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। सराय नदी का जलस्तर बढ़ने से नदी किनारे बने कई मकानों में पानी घुस गया है। हालात यह हैं कि कई जगह नदी और घरों में भरे पानी का जलस्तर एक हो गया है।

बारिश ने सराय नदी को नाला बताकर उसके आसपास हुई प्लाटिंग की पोल खोल दी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों तक नदी को नाला बताए जाने के कारण उसके आसपास बड़े पैमाने पर जमीनों की खरीद-बिक्री और मकानों का निर्माण हुआ। अब पानी घरों में पहुंचने के बाद लोगों के सामने अपनी जमा-पूंजी और आशियाना बचाने का संकट खड़ा हो गया है।

18 अगस्त 2008 की बाढ़ की याद भी ताजा हो गई है, जब सीतापुर शहर में बाढ़ का पानी पक्का पुल तक पहुंच गया था और आवागमन के लिए कैंची पुल ही प्रमुख रास्ता बचा था। इसके बावजूद सराय नदी के प्राकृतिक बहाव क्षेत्र में निर्माण और प्लाटिंग होती रही।

नागरिकों का आरोप है कि सराय नदी को नाला बताने की कवायद का फायदा आम लोगों से ज्यादा जमीन के कारोबारियों को मिला। उनका कहना है कि यदि कागजों में सराय नदी आज भी दर्ज है तो उसके आसपास बड़े पैमाने पर प्लाटिंग और निर्माण कैसे हुआ।

अब प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती है—बाढ़ से लोगों को बचाना और सराय नदी के आसपास हुए निर्माण की सच्चाई सामने लाना। लोगों ने नदी की पैमाइश, बहाव क्षेत्र की जांच और प्लाटिंग व निर्माण की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।

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