एफसीआई गोदाम से मजदूरों की छंटनी पर बवाल, रोजी-रोटी बचाने को सड़क पर उतरे 200 श्रमिक

रिपोर्टर रोहित मिश्रा रायबरेली

धारा लक्ष्य समाचार पत्र

रायबरेली। एफसीआई गोदाम में वर्षों से पल्लेदारी और मजदूरी कर रहे श्रमिकों ने काम से बाहर किए जाने के विरोध में प्रदर्शन किया। मजदूरों का आरोप है कि ठेकेदार बदलने के बाद बिना किसी पूर्व सूचना या नोटिस के उन्हें गोदाम में प्रवेश से रोक दिया गया है। इससे करीब 200 मजदूरों के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।प्रदर्शन कर रहे।

श्रमिकों ने बताया कि वे लंबे समय से एफसीआई गोदाम में पल्लेदारी का कार्य कर अपने परिवारों का भरण-पोषण कर रहे थे। उनका कहना है कि 29 अगस्त से उन्हें काम पर नहीं लगाया जा रहा है। रोजाना गोदाम पहुंचने के बावजूद गेट पर ही रोक दिया जाता है, जिससे परिवारों के सामने आर्थिक संकट गहरा गया है।मजदूर प्रकाश गुप्ता ने बताया कि वह पिछले दो वर्षों से ठेके पर कार्य कर रहे हैं,

जबकि इससे पहले भी करीब आठ वर्षों तक इसी गोदाम में काम कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि पहले जहां हर माह 10 से 15 हजार रुपये तक की आय हो जाती थी, वहीं अब आमदनी घटकर 4 से 5 हजार रुपये रह गई है। ऐसे में परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है।वहीं मजदूर विनोद कुमार ने बताया कि वह प्रतिदिन सुबह गोदाम पहुंचकर पल्लेदारी का काम करते थे।

प्रति बोरी के हिसाब से मिलने वाली मजदूरी से दिनभर की मेहनत के बाद करीब 200 से 250 रुपये की कमाई होती थी। इसी आय से घर का खर्च चलता है, लेकिन काम बंद होने से परिवार के सामने भुखमरी जैसी स्थिति पैदा हो गई है।मजदूरों का आरोप है कि उन्हें काम बंद होने की कोई लिखित सूचना नहीं दी गई और न ही गोदाम परिसर में कोई नोटिस चस्पा किया गया। श्रमिकों का कहना है कि अंदरूनी सूत्रों और ठेकेदार की ओर से छह माह तक काम बंद रहने की बात कही जा रही है।

ऐसे में मजदूरों के सामने भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई है।अपनी मांगों को लेकर मजदूरों ने जिलाधिकारी सरनीत कौर ब्रोका से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। श्रमिकों के अनुसार जिलाधिकारी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए दो दिनों के भीतर जांच कर आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया है। प्रशासन के आश्वासन के बाद मजदूरों को उम्मीद जगी है कि जल्द ही उनकी समस्या का समाधान होगा और उन्हें पुनः रोजगार मिल सकेगा।

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