रिपोर्टर रोहित मिश्रा रायबरेली
धारा लक्ष्य समाचार पत्र
रायबरेली/लालगंज क्षेत्र की ग्रामसभा पहुरी मजरे निहालखेड़ा में स्वच्छता व्यवस्था और बदहाल सड़क की स्थिति को लेकर खबर कवरेज करने पहुंचे पत्रकारों के साथ कथित दुर्व्यवहार का मामला सामने आया है। घटना के बाद पत्रकारों में आक्रोश व्याप्त है और मामले को प्रेस की स्वतंत्रता से जोड़कर देखा जा रहा है।
जानकारी के अनुसार पत्रकार जितेंद्र सविता ग्रामसभा में जनहित से जुड़े मुद्दों की कवरेज कर रहे थे। इसी दौरान ग्राम प्रधान के प्रतिनिधि बताए जा रहे अमन सिंह मौके पर पहुंचे और कथित रूप से कवरेज करने से रोकने लगे। आरोप है कि उन्होंने पत्रकारों से कहा कि ग्रामसभा में किसी भी प्रकार की खबर कवरेज करने से पहले ग्राम प्रधान अथवा उनके प्रतिनिधि की अनुमति लेना आवश्यक है।
पत्रकार का आरोप है कि जब उन्होंने इस पर आपत्ति जताई तो उनके साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया और कवरेज में बाधा डालने का प्रयास किया गया। घटना से आहत पत्रकार ने तत्काल डायल-112 पुलिस सेवा को सूचना दी और अपने अन्य पत्रकार साथियों को भी मौके पर बुला लिया।कुछ ही देर में पुलिस टीम, पत्रकार साथी और ग्राम प्रधान भी घटनास्थल पर पहुंच गए,
लेकिन पत्रकारों का आरोप है कि मौके पर समस्या के समाधान और मीडिया कर्मियों के सम्मानजनक व्यवहार को लेकर अपेक्षित सहयोग नहीं मिला।मामले की गंभीरता को देखते हुए पत्रकार जितेंद्र सविता ने लालगंज थाने पहुंचकर पूरे घटनाक्रम की जानकारी पुलिस को दी। थाना प्रभारी के विशेष कार्य से बाहर होने के कारण उन्हें संबंधित अधिकारी को प्रार्थना पत्र देने की सलाह दी गई।
बाद में पत्रकार द्वारा महिला हेल्प डेस्क पर तैनात महिला कांस्टेबल को लिखित शिकायत सौंपते हुए कार्रवाई की मांग की गई।
प्रेस की स्वतंत्रता पर खड़े हुए सवाल
घटना के बाद क्षेत्र में कई सवाल चर्चा का विषय बने हुए हैं। क्या किसी ग्रामसभा में जनहित, स्वच्छता, सड़क, विकास और सार्वजनिक समस्याओं की कवरेज के लिए पत्रकारों को ग्राम प्रधान या उसके प्रतिनिधि से अनुमति लेना आवश्यक है? क्या कोई जनप्रतिनिधि यह तय कर सकता है कि मीडिया किसी क्षेत्र की समस्याओं को जनता के सामने लाए या नहीं?
स्थानीय पत्रकारों का कहना है कि लोकतंत्र में मीडिया जनता और प्रशासन के बीच सेतु का कार्य करता है। ऐसे में यदि पत्रकारों को जनसमस्याओं की कवरेज से रोका जाता है तो यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सूचना के अधिकार जैसे मूल लोकतांत्रिक मूल्यों पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
अब सभी की निगाहें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं। पत्रकारों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई किए जाने की मांग की है, ताकि भविष्य में किसी भी मीडिया कर्मी को अपने कर्तव्य के निर्वहन में बाधा का सामना न करना पड़े।
