बुलडोजर नहीं, कानून व संविधान का राज चाहिए नई पीढ़ी संवाद का दूसरा दिन, चर्चा जारी
लखनऊ/वाराणसी।उत्तर प्रदेश के लोगों की बैंकों में जमा पूंजी दूसरे प्रदेशों और औद्योगिक घरानों को दी जा रही है। इस पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जानी चाहिए। दरअसल प्रदेश में पूंजी का कोई संकट नहीं है। यदि कृषि, एमएसएमई, रोजगार, तकनीकी, कोऑपरेटिव और महिला सशक्तिकरण पर इस पूंजी को खर्च किया जाए तो प्रदेश बीमारू प्रदेश के दंश से उबर सकता है।
प्रदेश में जारी खैरात बांटने की अर्थनीति नहीं स्वालंबन के अर्थव्यवस्था जरूरी है। यह बातें रोजगार-सामाजिक अधिकार अभियान (रोसा) की तरफ से वाराणसी यथार्थ होटल में जारी नई पीढ़ी संवाद के दूसरे दिन ऑल इंडिया पीपुल्स फ्रंट के संस्थापक सदस्य अखिलेन्द्र प्रताप सिंह ने कहीं।
आज उत्तर प्रदेश की राजनीतिक अर्थव्यवस्था पर पहले सत्र चलाया गया। जिसमें आंकड़ों और तथ्यों के साथ उत्तर प्रदेश के अर्थव्यवस्था पर आल इंडिया पीपुल्स फ्रंट की रिपोर्ट दिनकर कपूर ने रखी।
इस चर्चा में बीएचयू के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष अनिल श्रीवास्तव, वीरेंद्र कपूर, विनय कुमार सिंह, प्रज्ञा सिंह, जगदानंद सिंह, पीयूष श्रीवास्तव और पुरुषोत्तम सिंह ने भाग लिया। बातचीत में कहा गया कि प्रदेश का बजट 9.13 लाख करोड़ का है और प्रदेश पर कर्ज 9.18 लाख करोड़ का है। जो विकास के सरकारी दावों की पोल खोलता है। प्रदेश में पूंजी निवेश की कौन कहे लोगों की बैंकों में जमा पूंजी बाहर जा रही है।
बड़े निवेशकों से करार कर प्रदेश में पूंजी बढ़ाने का मॉडल पूरे तौर पर विफल साबित हुआ है। सरकार का दावा है कि उसने 47 लाख करोड़ के निवेश करार किए लेकिन जमीनी स्तर पर मात्र 3.50 लाख करोड रुपए का ही निवेश हो सका है। दरअसल जब देश के कॉर्पोरेट पूंजी लेकर विदेश भाग रहे हो तो भला उत्तर प्रदेश में कौन पूंजी लगायेगा। बुलडोजर राज में तो और भी कोई पूंजी निवेश नहीं करेगा। इसलिए प्रदेश में बुलडोजर नहीं संविधान व कानून के राज की बात मजबूती से संवाद में उठी।
आज के दूसरे सत्र में राहत से नए निजाम तक अल्पसंख्यकों के समक्ष चुनौतियों पर चार्टर्ड अकाउंटेंट अता रहमान ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि नोटबंदी और लॉकडाउन ने हमारे अर्थव्यवस्था को गहरा नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने दलित, आदिवासी, मुस्लिम व महिला जैसे वंचित समूहों के अधिकार और प्रतिनिधित्व पर जोर देते हुए जन जागरूकता करने और लोकल डिजिटल मीडिया खड़ा करने व जन सवालों को उठाने की बात कही।
संवाद का संचालन काशी विद्यापीठ के सेवानिवृत प्रोफेसर सुरेंद्र प्रताप सिंह ने किया और राजेश सचान और शम्मी कुमार सिंह ने उनकी मदद की। कार्यक्रम में संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष विजय शंकर पांडे, अरविंद किशोर राय, आनंद दीपायन, कुंवर सुरेश सिंह, आनंद मिश्रा, रेखा सिंह, अमन कुमार सिंह, आलोक राजभर, अजय राय, अखिलेश दूबे, रूबी सिंह गोंड, सविता गोंड, राजन सिंह, कृपाशंकर पनिका आदि नौजवान मौजूद रहे।
आज वर्तमान राजनीतिक स्थिति, संवैधानिक लोकतंत्र की चुनौतियां और जन आंदोलन की भूमिका के विषय पर चर्चा जारी है। देर शाम को छात्रसंघ चुनाव, छात्र राजनीति लोकतांत्रिक अधिकार और नई पीढ़ी की भूमिका पर विशेष सत्र भी आयोजित किया जा रहा है।
