मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के “आंदोलनकारियों को नौकरी नहीं” वाले तानाशाही फरमान के खिलाफ राज्यव्यापी विरोध का आह्वान
फासीवादी फरमान योगी आदित्यनाथ सरकार फौरन वापस ले
धारा लक्ष्य समाचार पत्र
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा की गई यह घोषणा कि आंदोलन में शामिल होने वालों को सरकारी नौकरी नहीं मिलेगी, यह मात्र एक बयान नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश में अघोषित आपातकाल और फासीवाद के लागू होने की घोषणा है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माले) रेडस्टार उत्तर प्रदेश राज्य इकाई इसकी घोर,तीखी निंदा करती है। पार्टी ने योगी आदित्यनाथ सरकार से फासीवादी फरमान को फौरन वापस लेने की मांग की है।
पार्टी राज्य सचिव कामरेड कन्हैया ने कहा कि हमारी पार्टी का स्पष्ट मानना है – जनता आंदोलन करती नहीं, उसे करने पर मजबूर किया जाता है। दोषी जनता नहीं, दोषी सरकार की नीतियां हैं।
योगी आदित्यनाथ का यह फासीवादी फरमान जनविरोधी और खतरनाक है ।यह भारत के संविधान पर सीधा हमला है।
संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) – अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, 19(1)(b) – शांतिपूर्वक सम्मेलन,आंदोलन,सभा करने का अधिकार, 19(1)(c) – संघ बनाने का अधिकार आम नागरिक को प्राप्त हैं। सुप्रीम कोर्ट ने अपने कई फैसलों – रामलीला मैदान बनाम गृह सचिव (2012) और मजदूर किसान शक्ति संगठन बनाम भारत संघ (2018) में स्पष्ट कहा है कि शांतिपूर्ण विरोध लोकतंत्र का सेफ्टी वाल्व है, इसे दबाने से लोकतंत्र का प्रेशर कुकर फटता है।
नौकरी का भय दिखाकर इस मौलिक अधिकार को कुचलना संविधान विरोधी कारवाई है और साथ ही साथ यह बेरोजगार युवाओं के भविष्य की हत्या है।उत्तर प्रदेश आज देश में बेरोजगारी की राजधानी बना हुआ है। 2017 से अब तक 20 से अधिक भर्ती परीक्षाओं के पर्चे लीक हुए। लाखों पद खाली हैं, पर नियुक्ति नहीं।
संविदा और आउटसोर्सिंग ने युवाओं को गुलाम बना दिया है। अब जो युवा अपनी इसी बेरोजगारी, पर्चा लीक, भ्रष्टाचार के खिलाफ सड़क पर उतरता है, उसी को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कह रहे हैं कि तुम्हें जीवन भर नौकरी नहीं मिलेगी? यह पीड़ित को ही अपराधी बनाना है। यह न्याय नहीं, यह प्रतिशोध है। यह अंग्रेजी राज की वापसी है।1922 में चौरी-चौरा के बाद अंग्रेजों ने कहा था – आंदोलन में शामिल लोगों को सरकारी नौकरी नहीं मिलेगी, उन्हें काला पानी होगा। आज 100 साल बाद वही भाषा योगी सरकार बोल रही है। फर्क सिर्फ इतना है कि तब गोरा साहब कहता था, आज भगवा वस्त्र में फासीवादी सत्ता कह रही है। यह फासीवादी चरित्र का नंगा रूप है।
बलिया से लेकर बुंदेलखंड तक किसान बर्बाद है, गंगा और घाघरा के कटान से सैकड़ों गांव कट रहे हैं, अर्णव तूफान से फसलें बर्बाद हैं, पर सर्वे और मुआवजा नहीं। जब किसान तहसील पर धरना प्रदर्शन करता है तो वह अपराधी कैसे हो गया?
छात्र-युवा त्रस्त हैं।विश्वविद्यालयों में फीस वृद्धि, छात्रसंघ चुनावों पर रोक, लाठियां। क्या छात्र अपने अधिकार न मांगे?आंदोलन समस्या नहीं है, आंदोलन समस्या का परिणाम है। बीमारी का इलाज करने के बजाय थर्मामीटर तोड़ना बंद कीजिए।
भाकपा माले रेडस्टार की यूपी राज्य इकाई की निर्णायक मांगें:
1. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपना यह असंवैधानिक, तानाशाही फरमान बिना शर्त वापस लें और प्रदेश के युवाओं से सार्वजनिक माफी मांगें।
2. यूपी पुलिस और प्रशासन द्वारा आंदोलनकारियों की बनाई जा रही कथित ‘डिजिटल लिस्ट’ और चरित्र सत्यापन में आंदोलन को अपराध के रूप में दर्ज करने की प्रक्रिया को तत्काल समाप्त किया जाए।
3. सभी लंबित भर्तियों को तत्काल, पारदर्शी तरीके से पूरा किया जाए और संविदा/आउटसोर्सिंग प्रथा खत्म कर स्थायी नियुक्ति दी जाए।
4. हमारी चेतावनी:
यदि यह काला फरमान वापस नहीं लिया गया, तो भाकपा माले रेडस्टार इसे एक व्यापक राजनीतिक हमले के रूप में लेगी और प्रदेश में “संवैधानिक अधिकार बचाओ, तानाशाही फरमान वापस लो” जन जागरण एवं हस्ताक्षर अभियान चलाएगी।
राज्य सचिव कामरेड कन्हैया कहा कि ने कहा कि “हम डरेंगे नहीं, झुकेंगे नहीं। नौकरी हमारा हक है, भीख नहीं। आंदोलन हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है। आप हमें नौकरी से वंचित करने की धमकी देकर हमारे पेट पर लात मारना चाहते हैं, हम आपके तानाशाही तख्त को उखाड़ फेंकने के लिए पूरे प्रदेश के मेहनतकशों को एकजुट करेंगे।”
